15.6.20

“वैश्विक सदभाव – वर्तमान विश्व की आवश्यकता “ हंस राज ठाकुर

मानव प्रादुर्भाव के साथ ही आदिकाल से वर्तमान युग तक मानव इतिहास के साथ संघर्ष की कड़ियाँ लगातार जुडती आ रही हैं I मानवता के विकास व् आपसी सम्बन्धों की लम्बी कहानी है, जनसंख्या वृद्धि, भाषाई अंतर, वैचारिक मतभेद, आपसी द्वेष, बाहुबल जैसी अनेक अवधारणाओं व् विषमताओं के चलते पूरा विश्व -देशों ,प्रदेशों, जिलों सहित गाँवों तक मानव स्तर पर विभाजित हुआ व् होता रहेगा I 

स्पष्ट है कि पुरे विश्व को एक परिवार में संजोया नहीं जा सकता था I शायद यह मानव सामर्थ्य से परे की बात थी अतः विश्व को 195 देशों के रूप में देखना पड़ रहा है और भविष्य में संख्या बढे तो अचरज नहीं होना चाहिए I मगर सैन्यबल, शैक्षणिक व् वैज्ञानिक उन्नति के चलते -विश्व के देशों में सद्भाव की गिरावट लगातार चलती रही I वर्तमान परिदृश्य में यह सद्भाव की कमी दो पड़ोसी देशों में या पड़ोसी राज्यों में भी देखी जा सकती है, यहाँ तक कि यह दृश्य जिलों, गावों तथा परिवारों में भी देखा जा सकता है जो पुरे विश्व समुदाय के लिए एक चिंतनीय विषय है I 

इन्ही वैचारिक, आर्थिक, भूगोलिक विषमताओं के चलते विश्व के कई पड़ोसी देशों के बीच में तनातनी का माहौल है, जो वर्तमान में चीन ने भारत के साथ पैदा किया है I आज जहाँ पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है , वहीँ चीन - जो आज पुरे विश्व की नजरों में संदिग्ध व् संदेहास्पद है, कोरोना से विश्व का ध्यान भटकाने हेतु - भारत के साथ सीमा तनाव पैदा करने में जुटा है I भारत द्वारा चीनी सामान के बायकाट से बौखलाया चीन यह हरकत करने पर विवस है I ग्लोबल टाइम्स के अनुसार भारत के लोग चीनी सामान के बिना नहीं रह सकते तो एक सर्वे के अनुसार आज लगभग 90 प्रतिशत भारतीय आबादी चीन के एप्प्स व् सामान के विरोध का मन बना चुके हैं जिससे चीन को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो सकता है I 

ऐसा नहीं कि यह हरकत चीन पहली बार कर रहा है इससे पहले भी सन 1962 में यह सब सीमा विवाद के रूप में देखा गया था और 43180 वर्ग कि. मी. क्षेत्र पर अवैध कब्ज़ा कर लिया जिसमे लगभग 38 हज़ार वर्ग कि. मी. जम्मू कश्मीर क्षेत्र से है I यहाँ तक कि दोनों देशों ने अपने राजदूत तक वापिस बुला लिए, चीन ने आरोप लगाया कि ये भारतीय दूतावास के लिए काम कर रहे थे I इस लड़ाई में चीन के लगभग 740 सैनिक मारे गए थे I एक बार फिर 1967 में 3 जुलाई से अगस्त माह तक यही कारनामा दोहराया I सन 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में जब भारत भारी पड़ने लगा तो चीन ने भारत को नाथुला दर्रा खली करने का अल्टीमेटम दिया ताकि पाकिस्तान पर दबाब हटाने के लिए भारतीय सेना पर दबाब बने I सन 1967 में इलाके में सैन्य तनाव कम करने के लिए भारतीय सैन्य अधिकारियों ने तय किया कि नाथुला से सेबुला तक भारत चीन सीमा को डीमार्केट करने के लिए तार का बाड़ा लगायेंगे I 11 सितम्बर सुबह काम शुरू होते ही चीनियों ने मशीनगन से फायरिंग शुरू कर दी तो भारतीय सैनिकों ने भी तोफों से गोलाबारी शुरू कर दी जिसमे चीन के 300 से ज्यादा सैनिक मारे गए I यह चीन ही था जिसने 1955 में पंचशील के सिद्दांत के बाद ' हिन्दू चीनी भाई-भाई' जैसे सद्भावपूर्ण वाक्य का सहारा लिया I 

1987 में एक बार फिर से भारत की थलसेना व् चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी के बीच सुम्दोरोंग् चु में तीसरी सैन्य झड़प हुइ और चीन के 1000 सैनिकों को जान से हाथ धोना पड़ा I 

इसके अलावा कोंगका दर्रा भारत के जम्मू व् कश्मीर राज्य के लद्दाख क्षेत्र में स्थित एक पहाड़ी दर्रा है , यह हिमालय की छंग-चेम्नो शृंखला में स्थित है I भारत के अनुसार यह पुर्णतः  भारत की भूमि पर है लेकिन चीन द्वारा नियंत्रित अकसाईं चीन क्षेत्र और लद्दाख के अन्य भाग के बीच में चीन भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा पर होने के नाते यह इन दोनों देशों के नियंत्रित क्षेत्रों के बीच में आता है I प्रसासनिक रूप से दर्रे-पार का क्षेत्र चीनी सरकार ने शिजियांग प्रान्त के खोतान विभाग में विलय किया हुआ है I 

इसी तरह उत्तर व् दक्षिण कोरिया में बंटवारे के वावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य व् राजनितिक लडाई जारी है I भारत पाक के बीच -विवादित पाक अधिकृत कश्मीर सहित विश्व भर में कई पडोसी देशों के अंदर अंतर् द्वन्द चल रहा है और इसके कुटनीतिक स्तर पर भी हल ढूंढे जा रहे है I 

आज वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कोई भी देश अपने को कमजोर नहीं आंकता -कई सैन्य बल में ताकतवर हैं , कई गोला बारूद व् वायु बल में, कई देश जैविक हथियारों की होड़ में लगे हैं और कुछ परमाणु संपन्न  देश हैं I भविष्य का युद्ध मानवता का अंत साबित हो सकता है अतः आज जरुरत है वैश्विक सद्भाव के चिंतन की – ताकि आने वाले किसी भी भयंकर विनाश से मानव सभ्यता को बचाया जा सके I शक्तिशाली को सदैव धैर्य के साथ आगे बढ़ते हुए कमजोर को सहारा प्रदान करना चाहिए – आशय यह है कि विकशित देशों को अपना सामर्थ्य व् सहयोग विकासशील देशों को देना चाहिए और विकासशील देश अपने से कमजोर पंक्ति में खड़े देशों की यथासंभव मद्द करे I आपसी मतभेद राजनितिक व् कुटनीतिक स्तर पर सुलझाये जाएँ I वैश्विक भाईचारा व् सद्भाव का वातावरण सृजित करना होगा I अंतर्राष्ट्रीय समस्यायों का हल आपस में मिल बैठकर ढूँढना होगा अन्यथा आज विज्ञान प्रगति इस मुकाम पर पहुंच गयी है कि हिरोशिमा व् नागाशाकी की घटनाएँ भी क्षुण नज़र आएगी I वास्तव में विश्व यदि भारत के 'बसुधेव कुटुम्बकम' के सिद्दान्त पर कार्य करता है तो ही मानव वैश्विक सद्भाव स्थापित करने में कामयाबी हासिल कर सकता है I 


                        हंस राज ठाकुर प्रवक्ता भौतिक शास्त्र हट्गढ़ मंडी (हि.प्र.)                

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.