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राफेल के मार्ग में बाधाऐ

1947 के बाद आज तक के देश के इतिहास पर नज़र दौड़ाता हूँ तो एक बात समझ में नहीं आती की कौन है वो और क्या कारण है जो देश की सेनाओं को कमज़ोर करने में लगा है।हम कोई भी आधुनिक उपकरण तैयार नहीं कर पा रहे है, कोई विदेशी सौदा करते है तो नेता बहुत हो हल्ला करने लग जाते है।देश जब तक सामरिक रूप से ताकतवर नहीं बनेगा तब तक विकास के सारी बात हवा हवाई रहेगी ,भारत गरीबी से कभी भी उभर नहीं पायेगा, चन्द उद्योगपति और भरष्टचारी ही धन धान्य से पूर्ण होंगे ।बोफोर्स सौदे में कॉमिशन दी गयी ये सब को पता है, पर स्वीडन में बनी इन्हीं तोपों के बल पर हमने कारगिल जीता।अब राफेल आधुनिक उपकरणो से सुसज्जित लड़ाकू एयरक्राफ्ट शामिल हो रहा है उसमें विरोध हो रहा है , क्यों? देश कि सेनाएं कमज़ोर बनी रहे पर क्यों, समझ से परे है।एक बार इतना आधुनिक एयरक्राफ्ट आ रहा है उसको आने दो ,वैसे तो मोदी भृष्टाचारी हो सकते है लगभग असम्भव है, पर है भी तो इनको आने  देना चाहिए,  ताकि सेनाओं मैं जान आये जैसे बोफोर्स से आयी थी।कहीं हमारे नेता किसी विदेशी ताकत के हाथों में तो नहीं खेल रही।कहीं ऐसा न हो गन्दी राजनीति देश को समाप्त करके ही न रख दे।भरष्टाचार होगा तो हमारी अदालतें निपट लेगी,देश की सुरक्षा तो थोड़ी मज़बूत होगी।हमारे कई समाचार चैनेल व् पत्रकार  बेहद नकरात्मक भूमिका निभा रहे है।

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