'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

मधुकर भारती नहीं रहे

2.5.150 पाठकों के सुझाव और विचार



विख्यात कवि-आलोचक व सर्जक पत्रिका के संपादक मधुकर भारती का शनिवार को आकस्मिक निधन हो गया। जैसे ही उनके निधन का समाचार मिला, प्रदेश के लेखकों में शोक की लहर दौड़ गई। अपने विनम्र स्वभाव के लिए युवाओं व वरिष्ठ लेखकों के बीच लोकप्रिय मधुक भारती की लेखन यात्रा चार दशक तक विस्तार लिए हुए है।
शिमला के ठियोग के रहने वाले मधुकर भारती उच्च अधिकारी के तौर पर सेवानिवृत हुए थे। डिवीजनल एकाउंट्स ऑफिसर के रूप में सेवा देने वाले मधुकर ऑल इंडिया एकाउंटस ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव रहे। उनका कविता संग्रह 'शरद कामिनी' बेहद चर्चित रहा। वे सर्जक पत्रिका का संपादन करते थे। मधुकर भारती के
निधन पर देश भर के लेखकों की संवेदनाएं आ रही हैं। मधुकर भारती ने ठियोग जैसे छोटे कस्बे में रहते हुए अनेक सफल गोष्ठियां आयोजित की। उन गोष्ठियों में देश भर के
चर्चित लेखक शामिल हुए। मधुकर भारती गद्य लेखन में सिद्धहस्त थे। उनके लिखे लेख कई संकलनों में शामिल रहे। उनकी कविताओं के प्रशंसकों में पहल के संपादक ज्ञानरंजन सहित देश के अन्य चोटी के कवि शामिल हैं। मधुकर भारती के निधन पर कथाकार एसआर हरनोट, वरिष्ठ कवि तेजराम शर्मा, वरिष्ठ कवि-आलोचक श्रीनिवास
श्रीकांत, लेखक सुंदर लोहिया, केशव, कुलराजीव पंत, बद्री सिंह भाटिया, आत्मा रंजन, सुरेश सेन निशांत, प्रत्यूष गुलेरी, सरोज वशिष्ठ , रौशन विक्षिप्त सहित विभिन्न लेखक संगठनों ने गहरा दुख जताया है। मधुकर भारती के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा व बेटियां हैं।
Share this article :

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.