Home » YOU ARE HERE » मेरी लिखी और गाई ग़ज़ल 'जलता दीपक हूँ हवाओं से तो बुझ जाउँगा ' दीपक शर्म...

मेरी लिखी और गाई ग़ज़ल 'जलता दीपक हूँ हवाओं से तो बुझ जाउँगा ' दीपक शर्म...

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