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पहेली 


अंत में जब मृत्युशैय्या पर 
बेबस लाचार पड़ा हूँगा 
क्या खोया क्या पाया 
इस जीवन में सोच रहा हूँगा 
आएंगे यमदूत उठाने 
स्वर्ग,नरक ले जाएंगे 
य फिर इस जीवन का 
अंत अनंत यहीं होगा 
यह है इक अनबुझी पहेली 
जिसका हल न कोई 
साक्षी भाव से देखो जीवन 
यही सबसे बेहतर होगा 

दीपक कुल्लुवी 
मैंगलोर 
21/8/14 

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2 पाठकों के सुझाव और विचार:

  1. मृत्यु और जीवन दो दरवाज़े हैं जीवात्मा एक दरवाज़े से निकल कर दूसरे में प्रवेश करता है। अंतकाल में व्यक्ति जो सोचता है उसी को प्राप्त होता है जो कृष्णभावना अमृत में रहता है वह वैकुण्ठ को जाता है उसके लिए यह अंतिम मृत्यु यानी परान्तकाल साबित होती है। सुन्दर पोस्ट।

    जवाब देंहटाएं
  2. मृत्यु और जीवन दो दरवाज़े हैं जीवात्मा एक दरवाज़े से निकल कर दूसरे में प्रवेश करता है। अंतकाल में व्यक्ति जो सोचता है उसी को प्राप्त होता है जो कृष्णभावना अमृत में रहता है वह वैकुण्ठ को जाता है उसके लिए यह अंतिम मृत्यु यानी परान्तकाल साबित होती है। सुन्दर पोस्ट।

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