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*****दीवान-ए-दीपक*****

*****दीवान-ए-दीपक***** 

कहने को बहुत दूर हो पर दिल के हो क़रीब 
मिलती है जुदाई जब ख़राब हो नसीब 
एक दिन ख़ुदा को यक़ीनन आएगा रहम 
हो नहीं सकती इतनी बेरहम तक़दीर  

दीपक 'कुल्लुवी'
१३-४ -१४ 

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