sponsor

sponsor

Slider

समाचार

साहित्‍य

धर्म और संस्‍कृति

स्‍वास्‍थ्‍य

इतिहास

खेल

विडियो


दीवान-ए-दीपक

मासूम थे ऐ-दोस्तों ख्वावों पे मर मिटे थे
उनकी झूठी बातें और वादों पे मर मिटे थे
हमनें उनकी वेवफाई को वफ़ा समझ लिया
गुनहगार तो हम थे जो यादों पे मर मिटे थे
******************************
उनको देखके हमने ठंडी आहें क्या भरी
वो कहते उनकी अदाओं पे तो दुनियाँ मरती है
अपने नाज़-ओ-नखरे तो इस दुनियाँ से निराले हैं
जाने सारी दुनियाँ क्यों इस नज़ाक़त पर जलती है
*****************************


ख्वावों पे भरोसा इतना कर
ताकत हो जितना सहने की
कहीं इतने ग़म मिल जाएँ न
आदत पड़ जाए पीने की


दीपक कुल्लुवी
04 -09 -2012 .
09350078399

«
Next
नई पोस्ट
»
Previous
पुरानी पोस्ट

कोई टिप्पणी नहीं:

Leave a Reply

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.