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घर की मुर्गी

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घर की मुर्गी

हिन्दोस्तान में हिंदी की
बेकद्री इतनी होती है
इसकी जननी भारत माँ की
आँख भी रोती है
हैल्लो,हाय,मॉम ,डैड
इसपे रहते हावी
अपनें ही घर में इसकी हालत
सौतन सी होती है
जिसको अपनी माँ बोली पर
मान नहीं होगा
उस देश का उस समाज का
क्या ख़ाक बिकास होगा
ए टू ज़ैड आता सबको
पर क,ख,ग किस किसको
घर की मुर्गी दाल बराबर
कहावत यहीं सच होती है

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
१०*०९*२०१२.
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