'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

वर्षा

5.8.120 पाठकों के सुझाव और विचार


                
काजल से अटा आकाश
मंद पड़ा सूर्य प्रकाश
मेघों से बूंदें लगी टपकने
आ गई वर्षा ।
धूल लगी पुछने
पत्‍ते लगे चमकने
हरीतिमा लगी फैलने
सब को हर्षा रही वर्षा ।
टप - टप की गूंज
झींगुरों की साज
खेत खलीयानों में
एकरस को आतुर माटी और वर्षा ।

निकले रंग बिरंगे छाते
सड़कों में जाम
भीगे तन भीगे मन
सब को अघा रही वर्षा ।
बूंदों की संगीत सरगम
नदी नाले उफान पर
जीव जंतु आनंद विभोर
सब को हर्षा रही वर्षा ।
कहीं बाढ़ कहीं खुशहाली
कहीं हर्ष कहीं विषाद
हर किसी का अपना मनोभाव
जो भी हो, हर्षा रही सब को वर्षा ।

                शेर सिंह   
                                     के. के.- 100 कविनगर
                                        गाजियाबाद - 201 001
                                                                                             E-Mail :shersingh52@gmail.com
                                 
                                                                                
Share this article :

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.