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ऐ बाबुल

17.6.121पाठकों के सुझाव और विचार



बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही  
मत तोड़ मुझे डाली से
खिलने दे अपनी बगिया ही …….

बेटा बनकर तुझको संभालूं
बुढ़ापे का बनूँगी सहारा भी
कभी न छोडूंगी तेरा दामन
आँखें बन करुँगी उजियारा भी

बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही......

रिश्ते जहाँ में झूठे हैं सारे
नहीं और रिश्ता तुझसा कोई
क्यूँ कहें दुनिया मोहे ऐ बाबुल
बेटी जैसा बोझ ना दूजा कोई

बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही.....

माँ की लोरी याद है आती
वो मुझको सहलाती बाहें तेरी
पुकारे मुझको घर का आँगन
ये महकती हुई फुलवारी तेरी

बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही.......

बचपन में तूने थामा हाथ मेरा
अब तुझको ना गिरने दूंगी कभी
समय को बदलने दे अपने तेवर
तू डर मत मैं न बदलूंगी कभी

बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही.....

कभी ना भटकूंगी कर्म पथ पर
हर मुश्किल से लड़ लूंगी मैं भी
आशीष तेरा रहे सदा मुझ पर  
बस इतना कर्म करना तू भी


बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही
मत तोड़ मुझे डाली से
खिलने दे अपनी बगिया ही........!!
                                   


  सु ..मन 
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