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दूर होकर








दूर होकर

दूर होकर तुझसे हम दूर कहाँ जाएँगे
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे
दूर होकर तुझसे हम दू ---------------
हम मुहब्बत के पुजारी हैं करो मुझपे यकीं
तुम पुकारोगे जहाँ हमको पाओगे वहीँ
हम तो सांसों हम तो आँखों में ही बस जाएँगे
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे
दूर होकर तुझसे हम दू ---------------
यह हकीकत है मेरे दिल पे हक है तेरा
मैं हूँ 'दीपक' मुझे अंधेरों ने अक्सर घेरा
गीत मेरे तेरे दिल को भी बहलाएँगे
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे
दूर होकर तुझसे हम दू---------------
गम नहीं वक्त का आखिर यह थम जाएगा
ज़ख्म गहरा ही सही आखिर भर जाएगा
लम्हें अच्छे हो बुरे सब ही गुज़र जाएँगे
दिल में झाँको तो सही पास नज़र आएँगे
दूर होकर तुझसे हम दू ---------------

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
09350078399
१८ मई २०१२.

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