Home » YOU ARE HERE » लगाव: मंडराते हैं

लगाव: मंडराते हैं



हर समय मंडराते ही
मेरे आस पास एक
नये  चक्र की ओर
सामने झलकने में
शायद परेशानी का
सबब  हो

प्रत्येक समय चाह कर
भी नजदीक आने में
कतराते हैं शायद उनको
परेशानी का सबब हो

एक नया पहल
झलकता है
जहाँ से हम गुजरते हैं
एक नया सा पहल है 
जो ठोस सा पहल है

प्रत्येक समय
कहीं न कहीं
उलझन हमारे प्रत्यक्ष
व इर्द गिर्द दिखाई देता है

0 comments:

टिप्पणी पोस्ट करें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.