'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

कुछ तो ब्लॉगर कहेंगे, ब्लॉगरों का काम है कहना : संतोष त्रिवेदी

23.5.120 पाठकों के सुझाव और विचार



संदर्भ : परिकल्पना सम्मान-2012
स्त्रोत जहां से चिंगारी उठी :  द्वितीय परिकल्पना सम्मान की उद्घोषणा 

यह चिंगारी देखते-देखते आग की लपटों मे तब्दील हो गयी ।रवीन्द्रप्रभात जैसे अनुभवी और कद्दाबर ब्लॉगर को लोग देने लगे बचकानी नसीहतें । उन्हें शायद नहीं मालूम कि रवीन्द्र प्रभात उन बिरले व्यक्तित्व मे से एक हैं जिनके ऊपर न तो विरोध का प्रभाव पड़ता है और न थोथी दलीलों का । मैं गवाह हूँ पिछले वर्ष संपन्न हुयी परिकल्पना सम्मान समारोह का, जब दिल्ली का हिन्दी भवन खचाखच भरे देश-विदेश के मूधन्य ब्लॉगरों से सजा था और मंच पर उद्घोषित हो रहे थे कई अद्भुत और विषमयकारी उद्घोषणायें। साक्षी था समय और समय के वे पहरूए जिनके होने मात्र से गरिमामय था समारोह । 

रवीन्द्र जी को दिये जाने वाले सुझावों की एक लंबी श्रृंखला है, शायद हिन्दी ब्लोगिंग के इतिहास मे यह पहली बार हुआ होगा जब किसी एक व्यक्ति की पहल की प्रतिकृया मे दर्जनों पोस्ट और कई सौ टिप्पणियाँ आई होंगी । रवीन्द्र जी की लोकप्रियता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है ।

इन सारे पोस्ट और प्रतिक्रियाओं के मंथन के पश्चात दिव्या केएक पोस्ट पर रवीन्द्र जी की नज़र पड़ी और वे उनके सुझाव पर खुल्ला खेल फरुखावादी खेलने को उत्सुक हुये और खेला भी । मगर इस सुझाव मे लोगों ने हदें पार कर दी और अपने-अपने शुभचिंतकों को नामित करना शुरू कर दिया, बिना किसी आधार के । जिसने कभी जीवन मे कहानी नहीं लिखी उन्हें कथाकार के रूप मे नामित किया गया । जिसने कभी कविता नहीं लिखी उन्हें कवि और कवियित्रि के लिए नामित किया गया। जिसने कभी ब्लॉग की समीक्षा नहीं की उन्हें ब्लॉग समीक्षक के लिए नामित किया गया । वाह रे ब्लॉग जगत वाह ।

यानि फ्लॉप हो गयी दिव्या जी की भी सलाह ।

अब एक नयी सलाह आई है नुक्कड़ पर संतोष त्रिवेदी जी की, जिनहोने पूरे प्रकरण का गहन अध्ययन किया है और सारगर्भित सलाह दी है कि “मैं तो यही कहूँगा कि रवीन्द्र जी कि आपके सारे प्रयोग विफल करने की सुनियोजित तरीके से मुहिम चलाई जा रही है, उसे समझने की कोशिश कीजिये और वैसे ही कीजिये जैसे आपने अपने कुछ निर्णायकों की मदद से पिछले वर्ष किया था। आपकी नियत पर जो संदेह कर रहे हैं उनकी परवाह करने की कोई जरूरत नहीं। आपकी तथा आपके द्वारा गठित निर्णायकों की राय मे जो ब्लॉगर पात्रता रखते हैं, उन्हें सम्मानित कर आपको जो खुशी होगी वो शायद इन विवादित टिप्पणियों को आत्मसात कर नहीं होगी । इसलिए अब समय आ गया है कि रवींद्र जी इस सम्मान-समारोह की गरिमा को बनाये रखें,इसे सीमित रखें और ऐसे वरिष्ठ लोगों का एक पैनल बनायें जो ब्लॉग-विषय और उसकी सार्थकता को ध्यान में रखें.जो लोग पैनल में हों,उनके अपने ब्लॉग इस दौड़ से बाहर हों. . उम्‍मीद करता हूं कि अब अवश्‍य ही कुछ सार्थक निकलकर हिंदी ब्‍लॉग जगत के हित में सामने आएगा,फिर भी रवीन्द्रजी,आपका निर्णय अंतिम और मान्य होगा,आप जैसा उचित समझें,वैसा करें ।"

Share this article :

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.