'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

हकीकतें

14.5.120 पाठकों के सुझाव और विचार


 मैं
जब भी सोचता हूँ

कि कितना अलग
सा लगता है
हकीकत से हटना
ओर  सामना करना

कहीं नया रंग रूप
नजर नहीं आता है
बदला  बदला धुंधलापन
बादल सा नजर आता है
जहाँ बदलना हकीकत
सा बन जाता है

मैं  समझ नहीं पाता
कि वहाँ कौन खड़ा है

मझधार में

जहाँ हम
एक दूसरे से अपने को
रूबरू होते हुये देखते
हैं सफर में जाने
पहचाने ।
Share this article :

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.