'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

[वटवृक्ष] छेडिये ईक जंग....

29.4.120 पाठकों के सुझाव और विचार


छेडिए इक जंग...

ग़ज़ल 


खेलिए ज़ज़्बात से मत खौफ़ तारी कीजिये 
मुस्करा के वेबजह ना  मेहरबानी  कीजिये 

छेडिये इक जंग ग़ुरबत को मिटाने के लिए 
घोषणा मत खोखली या मुँह जबानी कीजिये 

कौन है जो चांदनी का नूर फैलाता है अब 
सोचिये कुछ सोचिये कुछ मगजमारी कीजिये 

आइये , भरिये जहां में उल्फतें ही उल्फतें 
हर किसी से बात खुल कर प्यारी-प्यारी कीजिये 
बैठे - बैठे प्यास का मसअला होगा न हल-
बात तब है , पत्थरों में नहर ज़ारी कीजिये 

राम औ रहमान दोनो हैं अलग कहके प्रभात 
देश की आवाम को न पानी - पानी कीजिये 



रवीन्द्र प्रभात 
Share this article :

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.