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» » » » » » » *****फासले हमसे ज़मी के तो मिटाये ना गये*****--गज़ल

फासले हमसे ज़मी के तो मिटाये ना गये
यार वो गुज़रे कभी लम्हे भुलाये ना गये

हम हमेशा से रहे उलझे किसी उलझन लिये
फ़िर कभी ऐसे सकूने पल बिताये ना गये

वक्त की बेदिल गरद में दब गये शीशाए दिल
वो बचाते और बचते भी बचाये ना गये

आए भी वो जिन्दगी में यूँ हमारी थे मगर
जब गये तो यूँ लगा के वो न आये ना गये

सोच में डूबे रहे हम तो कभी खोये रहे
चाहकर भी राज़ ये हमसे बताये ना गये   !!
   

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2 पाठकों के सुझाव और विचार:

  1. बेहतरीन........आपको नववर्ष की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  2. नववर्ष शुभकामनाओं के लिए तह दिल से शुक्रिया !गज़ल पर टिप्पणी हेतु भी आभार !

    उत्तर देंहटाएं

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