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*****फासले हमसे ज़मी के तो मिटाये ना गये*****--गज़ल

28.12.112पाठकों के सुझाव और विचार

फासले हमसे ज़मी के तो मिटाये ना गये
यार वो गुज़रे कभी लम्हे भुलाये ना गये

हम हमेशा से रहे उलझे किसी उलझन लिये
फ़िर कभी ऐसे सकूने पल बिताये ना गये

वक्त की बेदिल गरद में दब गये शीशाए दिल
वो बचाते और बचते भी बचाये ना गये

आए भी वो जिन्दगी में यूँ हमारी थे मगर
जब गये तो यूँ लगा के वो न आये ना गये

सोच में डूबे रहे हम तो कभी खोये रहे
चाहकर भी राज़ ये हमसे बताये ना गये   !!
   

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