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यू. जी. सी. संपोषित ब्लॉगिंग पर पहली संगोष्ठी संपन्न

12.12.110 पाठकों के सुझाव और विचार

कल्याण (मुम्बई) विगत  ९ दिसंबर २०११ को सुबह १० बजे से कल्याण पश्चिम स्थित के.एम. अग्रवाल कला,वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग संपोषित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ. संगोष्ठी का मुख्य विषय था  "हिंदी ब्लॉगिंग: स्वरुप,व्याप्ति और संभावनाएं ". यह संगोष्ठी शनिवार १० दिसंबर २०११ को सायं ५ बजे तक चली.संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में डा. विद्या विन्दु सिंह 
(पूर्व निदेशिका उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ ),श्री रवि रतलामी (वरिष्ठ हिंदी ब्लॉगर,भोपाल,मध्य प्रदेश) एवं डा. रामजी तिवारी (पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग,मुम्बई विद्यापीठ मुम्बई) उपस्थित रहे .विशिष्ट अतिथि  के रूप में नवभारत टाइम्स मुम्बई के मुख्य उप संपादक श्री राजमणि त्रिपाठी भी उपस्थित रहे . संगोष्ठी का उदघाटन संस्था के सचिव श्री विजय नारायण पंडित ने किया.
प्रथम सत्र के विषय विशेषज्ञ रवीन्द्र प्रभात ने जहा कुछ पूर्व वक्ताओं की बातों में संशोधन प्रस्तुत किया। जैसे ब्लॉग को दोयम दर्जे का कतई न मानें, ब्लॉगों की संख्या हिन्दुस्तान में कुल पाँच लाख हो है किन्तु अकेले हिंदी में नहीं . हिंदी ब्लॉगरों की संख्या ५० हजार के आसपास है, जबकि सक्रिय हिंदी ब्लॉगरों की संख्या ५ हजार के आसपास है. यानी पूरी संख्या का केवल १० प्रतिशत .ब्लॉग शब्द की विशद व्याख्या करते हुए रवीन्द्र जी ने अपनी बात पूरी की, अन्त में यह जोड़कर कि - शुरू-शुरू में मुझे भी ब्लॉग बनाना नहीं आता था। २००५ में मुम्बई के एक ब्लॉगर  बसन्त आर्य ने मुझे ब्लॉग बनाकर दे दिया था। लेकिन आज मेरी दो-किताबे और अलेक्सा रैंकिंग में १३वें स्थान का ब्लॉग परिकल्पना मेरे नाम से दर्ज है। आप मुझसे से भी बड़ा ब्लॉगर बन सकते हैं। शुरुआत छोटी ही होती है। धीरे-धीरे बड़ा काम अन्जाम दे दिया जाता है।

मुम्बई की डा. संगीता सहजवानी ने अपने आलेख "अंतरराष्ट्रीय चौपाल पर आप सब आमन्त्रित हैं" के माध्यम से जहां मोहक प्रस्तुति दी वहीं डॉ. शशि मिश्रा ने रचना त्रिपाठी के ब्लॉग से यह उद्धरण भी दिया, कि हम और विरना खेले एक साथ,खेले एक साथ अम्मा खायें एक साथ ।विरना कलेवा अम्मा हँसी-हँसी देबो,हमरा कलेवा तुम दीजो रिसियायी। डॉ. पवन अग्रवाल ने कहा "ब्लॉग की तुलना पारम्परिक डायरी से मत करिए" वहीं बस्ती से आये डॉ. बलजीत श्रीवास्तव जी भी ब्लॉगिंग के स्वरूप पर अपना पर्चा पढ़ा . रवि रतलामी जी, अविनाश वाचस्पति , डा. अशोक कुमार मिश्र, डा. हरीश अरोरा, अनूप सेट्ठी,युनुस खान,चन्द्र प्रकाश मिश्र, विनीता रानी, सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी,अनिता कुमार,केवल राम आदि खुलकर ब्लॉगिंग के विविध आयाम को रेखांकित किया. इसी क्रम में  शैलेश भारतवासी और सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी ने भी अपने वक्तव्य से मंत्रमुग्ध कर दिया. रवि जी उदघाटन सत्र के दौरान हिंदी ब्लॉगिंग के प्रारंभिक चरणों की तथा वर्तमान सन्दर्भों विषद विवेचना पावर पोईन्ट प्रजेंटेशन के माध्यम से किया
इस संगोष्ठी का 'वेब कास्टिंग' के माध्यम से पूरी दुनिया में जीवंत प्रसारण (लाईव वेबकास्ट) भी किया गया ,जिसकी जिम्मेदारी वेब ब्लॉगिंग के विशेषज्ञ हिंदी ब्लॉगर श्री शैलेश भारतवासी को दी गयी थी . विश्वविद्यालय अनुदान आयोग संपोषित हिंदी ब्लॉगिंग पर आयोजित होने वाली यह देश की संभवत: पहली संगोष्ठी थी . उदघाटन सत्र के दौरान  हिंदी ब्लॉगिंग स्वरुप,व्याप्ति और संभावनाएं नामक पुस्तक का  लोकार्पण हुआ. हिंदी ब्लॉगिंग पर प्रकाशित होने वाली यह तीसरी पुस्तक थी . उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व हिंदी ब्लॉगिंग पर पहली पुस्तक अविनाश वाचस्पति और रवीन्द्र प्रभात द्वारा संपादित पुस्तक "हिंदी ब्लॉगिंग: अभिव्यक्ति की नई क्रान्ति तथा दूसरी रवीन्द्र प्रभात के द्वारा स्वरचित पुस्तक "हिंदी ब्लॉगिंग का इतिहास" है.
इस संगोष्ठी में संपूर्ण भारत से अनेकानेक प्रतिभागियों की उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख थे  भोपाल से रवि रतलामीलखनऊ से रवीन्द्र प्रभात और सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठीदिल्ली से अविनाश वाचस्पति और हरीश अरोरा, मेरठ से डा. अशोक मिश्र,हिमांचल प्रदेश से केवल राम,कोलकाता से शैलेश भारतवासी और आशीष मेहता,कानपुर से मानव मिश्र,पंजाब से डा. अशोक कुमार, मुम्बई से श्रीमती अनिता कुमार,युनुस खान और अनूप सेठी इत्यादि. 
साथ ही वरिष्ठ साहित्यकार श्री आलोक भट्टाचार्या भी इस संगोष्ठी में उपस्थित हुए . विभिन्न महाविद्यालयों -विश्वविद्यालयों से जुड़े प्राध्यापक भी बड़ी संख्या में इस संगोष्ठी में शामिल हुए . इनमें से कुछ प्रमुख नाम है -डा. राम जी तिवारी(मुम्बई),डा. आर. पी, त्रिवेदी(मुम्बई),डा. प्रकाश मिश्र(कल्याण),डा. एस. पी. दुबे (मुम्बई),डा. सतीश पाण्डेय(मुम्बई),डा. के. पी. सिंह(एटा),डा. ए.एन.राय (राय बरेली),डा. शमा खान(बुलंद शहर),डा. इश्वर पवार(पुणे),डा. गाडे(सतारा),डा. शास्त्री(कर्नाटक),डा. परितोष मणि(मेरठ),डा. अनिल सिंह(मुम्बई),डा. कमलिनी पानी ग्राही(भुबनेश्वर),डा. पवन अग्रवाल (लखनऊ),डा. मधु शुक्ला (इलाहाबाद),डा. पुष्पा सिंह (असम),डा. गणेश पवार(तिरुपति ),विभव मिश्र,मेल्बौर्ण(ऑस्ट्रेलिया),डा. सुरेश चन्द्र शुक्ल (नार्वे ),डा. शशि मिश्र (मुम्बई),डा. सुधा (दिल्ली),डा. विनीता रानी (दिल्ली),डा. बलजीत श्रीवास्तव(बस्ती),डा. विजय अवस्थी(नासिक),डा. संजीव दुबे(मुम्बई),डा. वाचस्पति (आगरा),डा. संजीव श्रीवास्तव(आगरा),डा. सजीव श्रीवास्तव(मथुरा) ,डा. डि. के. मिश्रा (झांसी) इत्यादि.
दो दिवसीय यह संगोष्ठी कुल छ: सत्रों में विभाजित थी . उदघाटन सत्र एवं समापन सत्र के अतिरिक्त चार चर्चा सत्र थे . पूरी संगोष्ठी का संयोजन महाविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रभारी डा. मनीष कुमार मिश्रा ने किया . चार चर्चा सत्रों के लिए चार सत्र संयोजक नियुक्त किये गए थे . क्रमश: डा. आर. वी. सिंह (उप प्राचार्य,अग्रवाल कॉलेज),डा. श्रीमती रत्ना निंबालकर (उप प्राचार्य, अग्रवाल महा विद्यालय),डा. वी. के. मिश्र (वरिष्ठ प्राध्यापक) एवं सी ए महेश भिवंदिकर  (वरिष्ठ प्राध्यापक अग्रवाल कॉलेज) थी . महाविद्यालय की प्राचार्या डा. अनिता मन्ना संगोष्ठी से जुडी तैयारियों की व्यक्तिगत तौर पर देख-रेख कर रही थी .
इस अवसर पर संस्था द्वारा कुछ हिंदी ब्लॉगर को अपने मंच पर 'ब्लॉगभूषण सम्मान' से सम्मानित किया। सम्मान सवरूप इन्हें सम्मान पत्र, पुष्पगुच्छ व शाल भेंट की गयी। जो सम्मानित हुए उनके नाम हैं : रवि रतलामी, रवीन्द्र प्रभात, अविनाश वाचस्पति, सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी, शैलेश भारतवासी, डॉ. हरीश अरोरा एवम्‌ डॉ. अशोक कुमार मिश्र।
इस संगोष्ठी की मुख्य बातें यह थी  कि यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संपोषित हिंदी ब्लॉगिंग पर संभवत: पहली संगोष्ठी थी, पूरे दो दिन की संगोष्ठी का वेब कास्टिंग के जरीय इसका इंटरनेट पर सीधा प्रकाशन हुआ. हिंदी चिट्ठाकारों एवं हिंदी प्राध्यापकों को एक साथ राष्ट्रिय  मंच प्रदान करने का यह नूतन प्रयोग था .
(कल्याण से डा. मनीष कुमार मिश्र की रपट )



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