sponsor

sponsor

Slider

समाचार

साहित्‍य

धर्म और संस्‍कृति

स्‍वास्‍थ्‍य

इतिहास

खेल

विडियो

» » » » » » » *****रूठते सिरफ वो तो मना ही लेते हम*****--गज़ल

रूठते सिरफ वो तो मना ही लेते हम
होते गिले शिकवे  मिटा ही लेते हम

हमसे खफा का तो सबब वो ही जाने
होती  खता कोई सज़ा ही लेते हम

ऐसी न थीं मजबूरियाँ कोई उनकी
होते दिले रुसवा खता ही लेते हम

वस्ल  हिज्र ज़माने की पुरानी बातें हैं
जो हाल हो खुलकर सुना ही लेते हम

रूठना कभी तो मान जाना वाजिब है
होता कहीं ऐसे निभा ही लेते हम  !!

«
Next
नई पोस्ट
»
Previous
पुरानी पोस्ट

4 पाठकों के सुझाव और विचार:

  1. nice one.

    gar saath nibhata vo mera ek kadam
    omar bhar ki bewafaii seh hi lete ham.

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी शायरी ,
    हमें मिलते तो ही मना लेते
    लेकिन जो मिलते ही नहीं
    कैसे फासला कम किया जाए|

    उत्तर देंहटाएं
  3. मुकेश जी,
    टिप्पणी के लिए आभार !जो मिलते हैं ,उनको मनाओ जो नहीं मिलते उनको खुदा के करम पर छोड़ दो !

    उत्तर देंहटाएं

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.