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हद हो गयी

10.10.110 पाठकों के सुझाव और विचार

हद हो गयी

मेरे भईया हद हो गयी
देश की अपने लुटिया डूब गयी
किस किस की अब करूँ में चर्चा
बात घोटालों की आम हो गई
सबसे बड़ी है यह परेशनी
किसको सुनाऊँ मैं अपनी कहानी
मेरा देश महान है अब भी
असल में बात यह हुई पुरानी
घोटालों नें तोड़ दी सीमा
दूभर हो गया सबका जीना
इसके ज़हर से बचोगे कैसे
घूँट तो सबको पड़ेगा पीना
बोफोर्स ,यूरिया,चारा घोटाला
चीनी दवाई हो य हवाला
कहाँ डालोगे अपनीं नज़र
है हर तरफ इसका बोलबाला
जितनें भी नेता पकडे जाएँगे
बाईज्जत रिहा हो जाएँगे
न्याय कानून की बेदम आवाज़
घोटालों में दब जाएगी

दीपक शर्मा कुल्लुवी


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