'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

हर शख्स ज़र्रा ज़र्रा खुशी को

20.9.111पाठकों के सुझाव और विचार


आज हर शख्स ज़र्रा ज़र्रा खुशी को तढपता है
हम तो खुशी बाँटते हैं 'रमेश'
फ़िर भी हर कोई हमसे क्योँ कटता है
आज हर शख्स ज़र्रा ज़र्रा खुशी को तढपता है !!

दिन को रात कहें और कहें रात को दिन
ऐसी तो हमारी फितरत ही  नहीं
हकीकत को हकीकत न कहें तो और क्या कहें
हकीकत से फ़िर क्योँ कोई डरता है !!

हमने तो खाक को भी सर पे उठाया यारो
हर इन्सा को अपना सोच के गले लगाया यारो
फ़िर हमसे क्योँ कोई शिकवा शिकायत करता है
फ़िर भी कोई हमसे क्योँ कटता है !!

हमने दिल खोल के जज़्बातों को निभाया यारो
सीने में कोई राज़ न  छिपाया यारो
फ़िर भी कोई हमसे क्योँ डरता है
आज हर शख्स ज़र्रा ज़र्रा खुशी को तढपता है !!


हमने ज़िंदगी को खुदा की कुदरत माना
कुदरत की हर शय को इबादत माना
हम इबादतखाने में इबादत न कर सके न सही
फ़िर भी क्योँ  कोई हमपे काफ़िर होने का शक करता है !!

फ़िर भी हम ज़िंदगी से बेहद खुश हैं यारो
ये सोच के भी हमसे क्योँ कोई जलता है
हम तो खुशी बाँटते है 'रमेश'
आज हर शख्स ज़र्रा ज़र्रा खुशी को तढपता है !!

Share this article :

+ पाठकों के सुझाव और विचार + 1 पाठकों के सुझाव और विचार

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.