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तुम जैसे भी हो, बस हो


जबसे मैंने
तुम्हारा दामन पकड़ा है
लोग मुझसे
हटते गए, कटते गए
लेकिन
तुम्हारा साथ पाकर
मैं आश्वस्त
मज़बूत होता चला गया
एकांत मेरे लिए
डरावना न होकर
सुखद होता चला गया
और मैं तुमसे
सीख गया,जान गया कि
शरीर रखते हुए
मुझे स्वार्थी तो
होना ही है
इसलिए
सुख के स्वार्थ में
मैं कष्ट भूल गया
और मैंने तुम्हे
गले लगा लिया
'सत्य' तुम जैसे भी हो
बस हो
तुमने स्वार्थ यानि
स्वयं के अर्थ का
अहसास दिलाकर
मुझे जीवन दे दिया !

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