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" उलझन"

14.9.110 पाठकों के सुझाव और विचार

न कोई गिला, न कोई शिकवा,
उनसे न मिलना भी है एक सजा;
न मिले हम उनसे तो दिल डूबा रहता है उनकी यादो में,
मिले अगर हम उनसे तो दिल डूबा रहता है अरमानो में;
डरते हैं हम कि कहीं हम  बह न जाएँ इन अरमानो में,
कहीं रह न जाये बस वो मेरे खयालो में;
मेरी जिंदगी में बस यही कशमकश है,
और बस यही मेरी जिंदगी की उलझन है;
जितना उनको खोना  है  मुश्किल,
उतना उनको पाना भी है मुश्किल;
अपने मजबूरे दिल का हाल बयान करूँ मैं किससे,
जो हैं मेरे अपने डरता भी तो हूँ मैं उनसे;
जिंदगी के इस दौर को मैं पार करूँ मैं कैसे,
उलझन जो है मेरे मन में उनको हल करू मैं कैसे;
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