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"सच"

दुनीया में प्यार है सब जगह,
फिर भी दिल ढूँढता है हर जगह;
मिल भी जाये प्यार अगर किसी को,
आजमाने में कर देते है बर्बाद वक़्त को ;
क्यों बदल देते है प्यार के परिभाषा को,
कभी नाम देते हैं मातृत्व तो कभी बंधुत्व कहते उसको;
क्या प्यार के मायने भी बदलते हैं हर जगह,
प्यार क्या होता है कभी हमने जाना ही नहीं'
अगर मिला भी तो हमने उसे माना ही नहीं;
प्यार तो खुदा का वोह तोहफा है'
जिसके ऊपर निसार सारा जीवन है;
जिनको मिलती है खुदा की रहमत,
प्यार मिलता है उनको उमरभर;
जिनको क़द्र नहीं प्यार की,
तरसते हैं प्यार के लिए वो जिन्दगी भर;

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