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कार्य कलात्मकता आनंदमयी जीवन |

11.7.110 पाठकों के सुझाव और विचार

किसी भी

कार्य करने से पहले
तुम्हारे मन का
यह पूर्वाग्रही विचार
कि यह कार्य
तुमने पहले भी किया है ,
तुम्हारे लिए कोई नया नहीं
तुम्हारी रचनात्मकता
तुम्हारी कलात्मकता को
दबा देता है
और
हर कार्य नया होते हुए भी
तुम सोचते हो
यह तुमने पहले भी किया है
यदि तुम अभी
दौड़ लगा रहे हो तो
फिर यह नहीं कह सकते कि
कल भी तुम
ठीक ऐसे ही दौड़े थे
जैसा कि आज
दौड रहे हो
यह इसलिए कि
तुम्हारी कल की दौड
और अभी आज की दौड
बिल्कुल भिन्न है
इसका रोमांच, आनंद
बिल्कुल नया
यदि तुम कल की दौड
भूलकर
आज अभी की दौड
एकाग्र, तल्लीन होकर
दौड रहे हो
अनुभव
यानि
अभ्यास का विचार
कला सधने का
विचार न होकर
कला के प्रति
रूचि, ताजगी
खो देने का
और कर्ता को
कार्य के प्रति यांत्रिक बना देने
और
हर नए कार्य को
पुराना समझने का विचार है
कला में
सततता है
कला….
प्रकृति अनुगामिनी
रुपपरिवर्तिता
आनंददायिनी है
कला जीवन का
ऐसा ही पर्याय है
जैसा व्यक्ति में
चल रही साँसे
और
रक्त-धमनियों में
ताज़ा हो रहा रक्त संचार
शरीर के
ताज़ा और प्रफुल्लित
होने का पर्याय है!



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