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संत के भक्त
(श्री ओम प्रकाश राही)

राही जी चले उन राहों पे
जिनमें शूल नहीं हैं कम
वायरी के संत चंद्रमणि वशिष्ठ
ह्रदय बसे हैं संग संग
गुरुवर की अनमोल विरासत
है प्रेम खज़ाना नहीं सियासत
युगों युगों से लगता है
जन्मों जन्मों का सम्बन्ध
ब्रह्मर्षी जी नें जो भी किया
भर भर अमृत सबनें पिया
जो कुछ अधूरा छूट गया
राही जी नें पूरा किया
साथ जुड़े हैं भक्त हजारों
होगा सबका उपकार
रहमत बरसेगी सबपर ही
मिले प्यार ही प्यार
दीपक शर्मा कुल्लुवी
०९१३६२११४८६
२१/०६/२०११.

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