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जशन-ए-मौत

हम तो अपनी मौत का भी जशन मनाएंगे
वह देखते रहेंगे दूर से हम हाथ न आएंगे
बजूद हमारा ख़त्म न होगा रहेंगे हम मौजूद
अपनें पराए कोई भी हमें छू न पाएंगे

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'

सदमा

कुछ सदमा ऐसा लगा
दिल टूट सा गया
क्या सुनाते हाल-ए-दिल उनको
कहने को ही कुछ न रहा
दीपक'कुल्लुवी' की मौत का
क्या जशन मनाओगे
जब चिता ही जलेगी न अपनी
तो क्या खाक जलाओगे

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'

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