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शान-ए-हिन्दोस्तान (''जयदेव विद्रोही'') एक विद्रोही प्यारा सा -19 (स्वतंत्र लेखक,पत्रकार) रिपोर्ट"दीपकशर्मा कुल्लुवी"जर्नलिस्ट (जर्नलिस्ट टुडे नैटवर्क)

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शान-ए-हिन्दोस्तान
(''जयदेव विद्रोही'')
एक विद्रोही प्यारा सा -19
(स्वतंत्र लेखक,पत्रकार)

रिपोर्ट"दीपकशर्मा कुल्लुवी"जर्नलिस्ट
(जर्नलिस्ट टुडे नैटवर्क)





















कोई इतनी मुहब्बत करता है
आप भूल नहीं पाते
जिंदगी उसकी ताउम्र
कर्जदार रहती है
...............

ऐसा एक कर्जा हम पर भी है श्री मति जैदेवी जी का जिनसे रिश्ता तो हमारा कोई नहीं था हम सब उन्हें प्यार से मासी जी कहते थे I वह जगत मासी थी सबसे बहुत प्यार करती थी I लेकिन मेरे साथ सबसे ज्यादा लगाव रहा I 'विद्रोही' जी भी जब कभी कुल्लू मेरे नानके जाते थे तो मासी जी के हाथ की चाय ज़रूर पीते थे I मेरी माँ से भी बहुत प्यार करती थी I मुझे याद है मैं कुल्लू कालेज में पढ़ता तो पेपरों से पहले अधिकतर मैं नाना नानी जी के घर कुल्लू रहता था I बेचारी मासी सारी रात उठ उठ कर हमें चाय नाश्ता देती रहती थी ताकी हम पढ़ सकें जबकि मासी जी को सुबह नौकरी पर भी जाना होता था फिर भी बहुत सेवा करती थी I बचपन से लेकर कालेज तक मुझे जितनें प्यार से पाला मेरी सेवा की कोई नहीं कर सकता I अपनीं रिटायरमेंट के बाद मासी जी कुल्लू छोड़कर काँगड़ा अपनी बड़ी बेटी अयोध्या सैनी के पास चली गयी I कई बार हम सब उनसे वहां पर मिलनें भी गए उनकी याद उनका प्यार हम और हमारा सारा परिवार जिंदगी भर नहीं भुला सकता I दुनियां में ऐसे लोग बहुत कम होते हैं I मेरे नाना नानी को भी उनसे बेहद मुहब्बत थी I
.........

ख्वाव अधूरे रह गए तो क्या
इसका नहीं कोई ग़म
इस दुनियां में दर्द के मंज़र
किसको मिले हैं कम
............
इक हादसा जिंदगी की
रफ़्तार बदल देता है
बेबस हो जाते हैं आप
कुछ ऐसा कर देता है
...........

पंजाबी ग़ज़ल
तेरे नाँ लाई-ए
सजणा वे जिंद अस्सी तेरे नाँ लाई-ए
फेर भी तैं साड्डे नाल कित्ती वेवफाई-ए
सजणा वे जिंद अस्सी ------------------------
'दीपक कुल्लुवी' नूं जीणा न आया
गमां दा खज़ाना अपणा बणाया
तैं ते बिछोड़े वाली राह दिखाई-ए
फेर भी तैं साड्डे नाल कित्ती वेवफाई-ए
सजणा वे जिंद अस्सी ------------------------
इश्क दी बाजी तुस्सी जित्ती अस्सी हारे हाँ
जींदे अस्सी तेरे ही गमां दे सहारे हाँ
तुस्सी ते ना इक बार कित्ती सुनवाई-ए
फेर भी तैं साड्डे नाल कित्ती वेवफाई-ए
सजणा वे जिंद अस्सी ------------------------
साड्डी मौत ते हंजु ना बहाणा
नाँ ही मजार ते दीप जलाणा
अस्सी ते मुहब्बत दी रीत निभाई-ए
फेर भी तैं साड्डे नाल कित्ती वेवफाई-ए
सजणा वे जिंद अस्सी --------------

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
09136211486

फोटो-1: मेरा सरस्वती रतन अवार्ड
फोटो-2 :हिमाचल कल्याण सभा दिल्ली का वार्षिकोत्सव
फोटो-3 :'विद्रोही' जी का अवार्ड हासिल करते हुए ददाहू में दीपक 'कुल्लुवी '

शेष अगले अंक-20 में

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