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आखरी पन्नें -18

(दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')

गतांक -17 से आगे













आंदे बिछोड़े

गमां दे हनेरे आ गए नेड़े
टुट गए ख्वाब सारे तेरे मेरे
तेरा कसूर सी न मेरा कसूर
--सुझ रहे सजणा आंदे बिछोड़े
(1 )इश्क ते भैड़ा बड़ा दुःख बड़े देंदा
सबनूं रुआंदा बड़ा जीण नी देंदा
एह ऐसी अग्ग जेहड़ी गमां नाल जोड़े
टुट गए ख्वाब सारे तेरे मेरे
गमां दे हनेरे आ ग---------
(2 )कुछ नइयों रेया पल्ले अस्सी कल्ले हो गए
दुनियां भी कैहंदी साहनूं अस्सी झल्ले हो गए
अस्सी पैर अपणे मयखाने बल्ल मोड़े
टुट गए ख्वाब सारे तेरे मेरे
(3 )दीपक 'कुल्लुवी' सी नाँ अस्सी जल गए
गमां दे खजानें अस्सी नाँ तेरे कर गए
हंजू अस्सी अपणे ही दिल विच रोहड़े
टुट गए ख्वाब सारे तेरे मेरे
गमां दे हनेरे आ ग---------
गमां दे हनेरे आ ग---------

फोटो:मेरी एक ऑयल पेंटिंग

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
09136211486
24 -05 -2011 .

शेष अगले अंक-19 में

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