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(''जयदेव विद्रोही'')
एक विद्रोही प्यारा सा -15
(स्वतंत्र लेखक,पत्रकार)

रिपोर्ट"दीपकशर्मा कुल्लुवी"जर्नलिस्ट

(जर्नलिस्ट टुडे नैटवर्क)





मुझमें और "विद्रोही" जी में एक बात सामान्य है हम दोनों समय के बहुत पावंद हैं यदि किसी को समय दिया है तो उससे एक मिनट पहले वेशक पहुँच जाये लेकिन देरी से नहीं पहुँच सकते I ऐसा करनें वालों पर गुस्सा भी बहुत आता है I जो व्यक्ति समय की कद्र नहीं कर सकता वह किसी की नहीं कर सकता I मुझे याद है जब मेरे ससुराल वाले रिश्ते के लिए हमारे घर आ रहे थे तो "विद्रोही" जी नें मेरी माँ और नानी जी से कहा मैनें "दीपक" के ससुराल वालों को शाम चार बजे तक का वक्त दिया है अगर वोह लोग समय पर नहीं पहुंचे तो मैं यह रिश्ता दूसरी जगह कर दूँगा I किस्मत से मेरे सास,ससुर चार बजे से कुछ देर पहले ही पधार गए वर्ना आज मेरी ज़िन्दगी में "कुमुद" की जगह कोई और होती I और एक बार उन्होनें कोई फैसला ले लिया फिर वह खुद की भी नहीं सुनते
वक्त ही वक्त
वक्त ही वक्त है जिनके पास
जीवन उनका है वीरान
खालीपन न डराता उनको
वोह भी करते कुछ तो काम
बेकार की बातें न करते
एक दूजे के कान न भरते
दिन भर यहाँ वहाँ बगलें न झांकते
समय का करते सम्मान
मेरे पास है वक्त की कमीं
बेकार का एक पल भी नहीं
छोड़ दो मुझको कुछ तो अकेला
करनें दो मुझे कुछ तो काम
आप भी समय को न व्यर्थ गवाओ
कभी किसी के काम तो आओ
कुछ भी करो पर करते जाओ
कर लो खुद पे ही एहसान
कर लो खुद पे ही एह----
दीपक शर्मा "कुल्लुवी"
9136211486
१३/०५/२०११.

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