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» » » » » » शान-ए-हिन्दोस्तान (''जयदेव विद्रोही'') एक विद्रोही प्यारा सा -14 (स्वतंत्र लेखक,पत्रकार) रिपोर्ट"दीपकशर्मा कुल्लुवी"जर्नलिस्ट (जर्नलिस्ट टुडे नैटवर्क)



(''जयदेव विद्रोही'')
एक विद्रोही प्यारा सा -14
(स्वतंत्र लेखक,पत्रकार)

रिपोर्ट"दीपकशर्मा कुल्लुवी"जर्नलिस्ट

(जर्नलिस्ट टुडे नैटवर्क)

"विद्रोही" जी के घर परिवार में कलाकारों की कमीं नहीं है इसमें एक नाम उनकी छोटी पुत्रबधू "कुमुद" का भी है जो इत्तफाक मेरी धर्मपत्नी भी है शिक्षिका होनें के साथ साथ भजन गायिका भी है और "दीपकुमुद सुर संगम संगीत क्लव " की प्रमुख है गांधर्व महाविद्यालय से हिन्दोस्तानी क्लॉसिकल संगीत की शिक्षा ग्रहण करके दिल्ली में डीO पीO एसO आर के पुरम स्कूल के अनुभव शिक्षा केंद्र में संगीत शिक्षिका थी लेकिन एक दुर्घटना के बाद छोड़ना पड़ा I उसके बाद रेडिको वैल्फैयेर स्कूल कालका जी और महिला शक्ति केंद्र स्कूल कालका जी नई दिल्ली में भी संगीत शिक्षिका रही I दिल्ली और दिल्ली के आस पास भजनों के उनके काफी छोटे बड़े कार्यक्रम होते रहते हैं मेरी खुशनसीबी यह है की वह मेरे लिखे भजन ही गाती है I हमेशा ही व्यस्त रहती है बहुत मेहनत कराती है और खुदा की मेहरबानी से आज काफी नाम है I अभी हाल में ही १५ अप्रैल को 64 वां हिमाचल दिवस समूचे हिमाचल प्रदेश के साथ साथ दिल्ली में भी बड़े हर्षोउल्लास के साथ हिमाचल भवन मंडी हॉउस में मनाया गया जिसमें " कुमुद"और मैनें अपना लिखा और संगीतबद्द किया हुआ पहाड़ी गीत "करी लेयां प्रीत मेरी जान काल्ला रा भरोसा क्या"प्रस्तुत किया जिसे सब श्रोताओं नें खूब सराहा I
श्री श्याम प्रभु खाटू वाले का पंचम रंग रंगीलो शरद महोत्सव श्री श्याम सेवक परिवार लक्ष्मी नगर दिल्ली में बहुत ही शानदार तरीके से मनाया गया था I जिसमें
हिन्दोस्तान के अलग अलग प्रान्तों से छह प्रमुख भजन गायक कलाकार आए थे I कोलकाता से श्री जयशंकर चौधरी और संजय मित्तल ,जयपुर से मुकेश बांगडा, दिल्ली से श्री मति कुमुद शर्मा "कुल्लुवी" यह बहुत बिशाल और सफल आयोजन रहा

"विद्रोही" जी नें और साथ में मेरे ससुर सO श्री फ़तेह चंद भापा जी नें भी हमेशा ही उसे आगे बढनें के लिए प्रेरित किया I और आज वह कामयावी के शिखर पर है I
इंसान को हमेशा ही सही ढंग से जीनें की इच्छा होनी चाहिए उसे छोटी छोटी बातों,दुखों से घबराना नहीं चाहिए I

आखिर

मौत तो आखिर आनी है
जब तक जीना है जियो तो सही
है ज़िन्दगी खुशियों की सौगात
जाम-ए-मुहब्बत पियो तो सही
घुट घुट के मर जाना क्या
दुःख,गम से डर जाना क्या
हसीन है हर लम्हा यारो
ज़ख्म-ए-जिगर सिओ तो सही
मौत तो आखिर आ-----------?
शेष अगले अंक 15 में


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