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शान-ए-हिन्दोस्तान (''जयदेव विद्रोही'') एक विद्रोही प्यारा सा भाग-7 (स्वतंत्र लेखक,पत्रकार) रिपोर्ट"दीपकशर्मा कुल्लुवी" सिटिजन जर्नलिस्ट (जर्नलिस्ट टुडे नैटवर्क)

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(''जयदेव विद्रोही'')

एक विद्रोही प्यारा सा भाग-7

(स्वतंत्र लेखक,पत्रकार)


रिपोर्ट"दीपकशर्मा कुल्लुवी" सिटिजन जर्नलिस्ट
(जर्नलिस्ट टुडे नैटवर्क)

"विद्रोही" जी की जिंदगी बिलकुल मेरी लिखी इन लाइनों जैसी ही है I वह सबके लिए बहुत कुछ करते हैं लेकिन उन्हें धोखा ही मिलता है "विद्रोही"जी को फिर भी कोई रंज नहीं I

हमनें जो भी लिखा
वोह गुनाह हो गया
वक़्त को यह आज
क्या हो गया
दिखाया जिस किसी को हमनें
हकीकत का आइना
वोह हर शख्स मुझसे ही
खफा हो गया
मुहब्बत-ओ-वफ़ा की बातें तो
अब इतिहास बन चुकी
अब तो कमबख्त दिल भी
बेवफा सा हो गया
बेवफा सा हो ग.........

जैनरेशन गैप के मायनें उनसे अच्छी तरह कोई नहीं समझ सकता इसलिए हम सब बच्चों,बहुओं,भतीजों, की खुशियों में वह कभी रोड़ा नहीं बनें उल्टा हमारी भावनाओं हमारी ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए उचित प्रबंध किए पैसा दिया कभी कोई प्रतिबंध हम सब पर नहीं लगाया I सबको आज़ाद रखा I यह खासियत हर किसी में नहीं होती I हर बजुर्ग जो बच्चों को छोटी छोटी बात के लिए तंग करते हैं उन्हें "विद्रोही" जी से सीख लेनी चाहिए I ज़िन्दगी जीनें का सही ढंग इन्हें आता है I
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नां पूछ मुझसे मेरा हाल-ऐ-दिल ऐ-दोस्त
हम तो हंसते रहेंगे अश्क आपके ही छलक जाएँगे
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कुछ समय पहले मेरे पिता श्री जयदेव "विद्रोही" जी का चंडीगढ़ में ऑपरेशन था लेकिन उन्होंने हमें बतलाया ही नहीं और कुल्लू से मेरी माँ के साथ अकेले ही चले आए और ' फोर्टीज 'हॉस्पिटल में भर्ती हो कर ऑपरेशन करवा भी लिया I इतना होंसला आज भी उनमें है और मेरी मजबूरी की चाहकर भी उनके पास नहीं पहुँच सकता था क्योंकि में दिल्ली में था और जब मुझे पता चला तो उस समय उन्हें ऑपरेशन थियेटर में ले जाया जा चुका था I मुझे उनसे बेहद प्यार है I वह भी हमें बहुत प्यार करते हैं I खैर खुदा की कृपा से ऑपरेशन सफल हुआ उनमें खुद्दारी इतनीं है की बह किसी को तंग नहीं करना चाहते थे दुनियाँ जहाँ के रंज-ओ-ग़म अकेले ही सहते रहते हैं I
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यह मैं जानता हूँ या मेरा खुदा
मुहब्बत की कितनीं पायी सजा
जलते रहे फिर भी हंसते रहे
ऐसी अनोखी है उनकी अदा
......................
शेष अगले अंक-8 में

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