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एहसान

तकदीर क्या रूठी मुझसे
यह जग मुझसे रूठ गया
गैरों से क्या शिकवा गिला
साथ अपनों का छूट गया
तकदीर आज ऐसे मोड़ पर
लेकर आ गयी मुझको
बेबस हम थे दिल में गम थे
कैसे दिखाते तुझको
ख्वाब गर दीपक "कुल्लुवी" के
अधूरे रहे तो क्या गम है
ज़ख्मों पे नमक वह छिड़कते रहे
एहसान यह उनका क्या कम है
आज मेरी तकदीर मुझे
उस मोड़ पे ले आयी
जहाँ से कैद-ए-मुशक्कत-मुमकिन
पर हो नहीं सकती रिहायी

दीपक शर्मा "कुल्लुवी"
22 -04 -2011
9136211486

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