'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

एहसान

22.4.110 पाठकों के सुझाव और विचार











एहसान

तकदीर क्या रूठी मुझसे
यह जग मुझसे रूठ गया
गैरों से क्या शिकवा गिला
साथ अपनों का छूट गया
तकदीर आज ऐसे मोड़ पर
लेकर आ गयी मुझको
बेबस हम थे दिल में गम थे
कैसे दिखाते तुझको
ख्वाब गर दीपक "कुल्लुवी" के
अधूरे रहे तो क्या गम है
ज़ख्मों पे नमक वह छिड़कते रहे
एहसान यह उनका क्या कम है
आज मेरी तकदीर मुझे
उस मोड़ पे ले आयी
जहाँ से कैद-ए-मुशक्कत-मुमकिन
पर हो नहीं सकती रिहायी

दीपक शर्मा "कुल्लुवी"
22 -04 -2011
9136211486

Share this article :

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.