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शान-ए-हिन्दोस्तान (''जयदेव विद्रोही'') एक विद्रोही प्यारा सा

31.3.110 पाठकों के सुझाव और विचार

शान--हिन्दोस्तान

(''जयदेव विद्रोही'')

एक विद्रोही प्यारा सा
(स्वतंत्र लेखक,पत्रकार)

रिपोर्ट"दीपकशर्मा कुल्लुवी"जर्नलिस्ट
(जर्नलिस्ट टुडे नैटवर्क)



एक "विद्रोही" प्यारा सा क्या ऐसा हो सकता है
मेरे दिल में झाँक के देखो वो कैसा हो सकता है
चेहरे पे मुस्कान हमेशा बेशक़ दिल में ग़म हैं बहुत
लाखों करोड़ों में ही कोई शख्स ऐसा हो सकता है
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एक विद्रोही प्यारा कैसे हो सकता है ? यह असंभव सी बात लगती है लेकिन ऐसा है I देव घाटी कुल्लू में रहनें वाले कवि,लेखक,विद्वान्, श्री जयदेव 'विद्रोही' कहनें को तो 'विद्रोही' नाम से विख्यात हैं लेकिन उनका दिल एक नन्हें बच्चे से भी ज्यादा मासूम है I लेकिन वक़्त और हालात नें उन्हें 'जयदेव शर्मा' से 'जयदेव विद्रोही' बना दिया मृदुभाषी विद्रोही जी मेहनत,लगन कि मिसाल है I ऐसे कर्मठ इन्सान दुनिया में कम ही मिलते हैं I कला,पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में मुझे नहीं लगता की समूचे हिमाचल प्रदेश में उनसे ज्यादा किसी और की उपलब्धियां रहीं हों I आज इस उम्र में भी वह पूर्ण रूप से समर्पित और सक्रिय हैं I अभी हाल में ही लिखी गई उनकी पुस्तक 'हिमाचल का मिर्ज़ा ग़ालिब'"चाँद कुल्लुवी" बहुत चर्चा में रही I इससे पहले कविताओं की लिखी पुस्तक बेताबियाँ भी खूब सराही गयी I उस समय के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को भी यह पुस्तक बहुत पसंद आयी थी जबकि 'विद्रोही' जी कट्टर कांग्रेसी हैं और अटल जी बीO जेO पीO के I "विद्रोही" जी ने कांग्रेस के लिए भुट्टी कालोनी स्थित भुट्टी विवर्स प्रमुख ठाकर वेद राम जी के सपुत्र ठाकुर "सत्य प्रकाश" जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया I आजकल " श्री रमेश चन्द्र मस्तना " जी "विद्रोही" जी के साहित्यिक मित्र हैं जो उनके साथ् 'आथर्स गिल्ड ऑफ़ हिमाचल प्रदेश'को आगे बढानें के लिए रात दिन मेहनत कर रहे हैं पौंटा साहिब से श्री अजय शर्मा जी,विन्दु पंडित भी अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर इसे आगे बढानें में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं I

विद्रोही जी की कलम से निकली चंद लाइनें :
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झरनें का धर्म कोई न पूछे जात उसकी अन्जानी है
आता जाता हिन्दू मुस्लिम पीता उसका पानी है
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जब दर्द पुराना उठता है कई यादें ताज़ा होती हैं
दर्द -ए-गम की खलिश पुरानी मीठी मीठी होती है
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मृग मरीचिका छल गई मेरा भोला भला लड़कपन
उमड़े हुए सीनें में तूफाँ 'विद्रोही' आज बना बैठे
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वर्तमान में विद्रोही जी कुल्लू हिमाचल में रहते हैं और 'आथर्स गिल्ड ऑफ़ हिमाचल प्रदेश' के फाउंडर प्रेसीडैंट हैं I कुल्लू प्रैस के चीफ अडवाईज़र,कई अखबारों के रिपोर्टर,जर्नलिस्ट हैं य रह चुके हैंI'विद्रोही' जी को सैंकड़ों अवार्ड मिल चुके हैं जिनमें पंजाब साहित्य अकैडमी अवार्ड,बलराज साहनी अवार्ड,सिरमौर कला संगम अवार्ड,गुरुकुल अवार्ड ,भाषा बिभाग अवार्ड,वेद राम ठाकुर अवार्ड,हिमबुनकर अवार्ड, इण्डिया टीO वी अवार्ड ,मृणाल अवार्ड, प्रमुख हैं I आये दिन कहीं न कहीं उनके कवि सम्मलेन होते ही रहते हैं I समूचे प्रदेश में साहित्यक गतिविघियों को सारे प्रदेश में फ़ैलाने का गौरब विद्रोही जी को ही है I कई भाषाओँ के ज्ञाता विद्रोही जी विद्वान पंडित और प्रभावशाली प्रवक्ता हैं I आज मेरे नाम के साथ अगर लेखक जुड़ा हुआ है तो केवल 'विद्रोही' जी के कारण I बचपन से ही उनहोंने ऐसे संस्कार भरे और हाथ में ऐसी कलम थमायी की आज तक निरंतर चल रही है चलती जाएगी I
'विद्रोही' जी के कमरे अवार्डों से भरे पड़े हैं 'विद्रोही' जी की रचनाएँ लगभग हररोज़ ही किसी न किसी अख़बार ,पत्र पत्रिकाओं में छपती रहती हैं I विद्रोही जी की संस्था ' आथर्स गिल्ड ऑफ़ हिमाचल प्रदेश'को हजारों लेखकों को दुनियां के सामने लाने का गौरव हासिल है I हजारों कलाकारों को अवार्ड्स दिए हैं I उनके लेखन को किताबों,पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से छाप कर बाहर लाया है,सराहा है,उन्हें एक पहचान दिलवाई है I
"विद्रोही"जी का जन्म 6 जुलाई 1935 को ऐतिहासिक नगर पुराना कांगड़ा (नगरको) हिमाचल प्रदेश में अपनें समय के विद्वान पंडित 'श्री मनीराम शर्मा 'जी और माता श्रीमति " नारो
देवी" जी के हुआ इन्होंने 11 वर्ष की आयु में ही संस्कृत ग्रन्थ अमर कोष कंठस्थ कर लिया था I
विद्रोही जी 1993 में आबकारी ऐवं कराधान निरीक्षक पद से सेवानिवृत हुए I
धर्मपत्नी : श्रीमति विद्या देवी (ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर सेवानिवृत )
आने वाली पुस्तकें : अतीत,व्यती,निशीथ (हिंदी कहानी संग्रह)
कहानी संग्रह : सरलियां चूडियाँ (हिमाचली पहाड़ी)
पुस्तक प्रकाशन : काव्य संग्रह "बेताबियाँ" जिसका बिमोचन उस सम के हिमाचल के मुख्यमंत्री
श्री " बीरभद्र सिंह "जी ने किया था शिमला में I
संकलित कहानी संग्रह "संकल्प"
पहली कविता:1953
पहली कहानी:1957
सम्पादन कार्य:1969-70 से सरकारी कर्मचारियों की खबार "सरवरी" का स्व. मधुकर जी के साथ संपादन सरकारी /गैरसरकारी त्र पत्रिकाओं में कहानी, कविता, लेख तथा निबंध प्रकाशित I वर्तमानमें सहकार शिखर (त्रिमासिक पत्रिका का सम्पादन ) वीर प्रताप, जनसत्ता, दैनिक
ट्रिव्यून तथा,दिव्यहिमाचल में बतौर संवादाता कार्य I
"विद्रोही" जी मेरे पिता श्री ही नहीं,मेरे प्रेरणा स्त्रोत मेरे मित्र मेरे सबकुछ हैं I
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अफ़सोस मुझे है खुद पे कोई फ़र्ज़ निभा न पाया मैं
जब भी ज़रुरत थी मेरी चाहकर भी जा न पाया मैं
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पहाड़ी भाषा को मान्यता दिलवाने के लिए विद्रोही जी नें कई वर्षों से अभियान चलाया I "विद्रोही" जी का एक अपना अलग दिलकश अंदाज़ है I अपनी एक शैली हैI अथाह ज्ञान भंडार है उनके पास I बेवाकी से बोलना उनकी रग रग में शामिल है I किसी से डरना उन्होंने कभी सीखा नहीं I एक बहुत अच्छे सलाहकार हैं घर पर हमेशा सलाह लेने वालों का ताँता लगा रहता है चाहे वोह पत्रकार लोग हों,दोस्त मित्र हों य पास पड़ोस वाले I


पता:
श्री जयदेव 'विद्रोही'
दीपक साहित्य सदन
गणेश चौक,शमशी कुल्लू हिमाचल प्रदेश
पिन कोड 175126
मोबाईल 09318599987
फोटो :'आथर्स गिल्ड ऑफ़ हिमाचल प्रदेश' के सदस्यों द्वारा कवि सम्मलेन ब्रह्मकुमारी आश्रम शमशी में साथ में हैं ब्रह्मकुमारी प्रमुख नीरू जी I
रिपोर्ट "दीपक शर्मा कुल्लुवी" जर्नलिस्ट (जर्नलिस्ट टुडे नैटवर्क)

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