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लो क सं घ र्ष !: वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण -२०१० (भाग-१)

2.1.110 पाठकों के सुझाव और विचार


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वर्ष २०१० :ब्लोगिंग के तीव्र विस्तार से ब्लोगरों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती पैदा हुई ==========================================================


वर्ष १९९९ में आरम्भ हुआ ब्लॉग वर्ष २०१० में ११ साल का सफर पूरा कर चुका है ,वहीं हिंदी ब्लॉग ७ साल का । गौरतलब है कि पीटर मर्होत्ज ने १९९९ में ‘वी ब्लॉग’ नाम की निजी वेबसाइट आरम्भ की थी, जिसमें से कालान्तर में ‘वी’ शब्द हटकर मात्र ‘ब्लॉग’ रह गया। ब्लॉग की शुरुआत में किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन ब्लॉग इतनी बड़ी व्यवस्था बन जायेगा कि दुनिया की नामचीन हस्तियाँ भी अपने दिल की बात इसके माध्यम से कहने लगेंगी। आज पूरी दुनिया में १५ करोड़ से ज्यादा ब्लॉगर्स हैं तो भारत में लगभग ३५ लाख लोग ब्लॉगिंग से जुड़े हुए हैं। इनमें करीब २५ हजार हिन्दी ब्लॉगर हैं, इस संख्या को देखा जाए तो हिंदी में ब्लोगिंग अभी भी संक्रमण के दौर में है ।


हिन्दीभाषी किसी मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करने, भड़ास निकालने, दैनिक डायरी लिखने, खेती-किसानी की बात करने से लेकर तमाम तरह के विषयों पर लिख रहे हैं।आज तो ब्लॉगिंग केवल एक शौक या अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं रहा बल्कि ब्लॉगर अपने ब्लॉग की लोकप्रियता के अनुसार लाखों रुपए हर महीने कमा रहे हैं। कंपनियाँ अपने उत्पादों का प्रचार करने के लिए ब्लॉगरों की मदद लेती हैं और विज्ञापन देने वाली कंपनियाँ विज्ञापन पोस्ट करने के लिएकिन्तु ऐसा हिंदी में अभी संभव नहीं हो पाया इसका एक मात्र कारण है हिंदी में ब्लोगिंग का व्यापक विस्तार न होना ।


हिंदी ब्लोगिंग वर्ष-२०१० में ७ वर्ष पूर्ण कर चुकी है । यह सुखद पहलू है कि विगत कई वर्षों की तुलना में वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग समृद्धि की ओर तेज़ी से अग्रसर हुई है । इस वर्ष लगभग ८ से 10 हजार के बीच नए ब्लोगर्स का आगमन हुआ है , किन्तु सक्रियता के मामले में इस वर्ष आये ब्लोगर्स में से केवल ५०० से १००० के बीच ही सक्रिय हैं और सार्थक लेखन के मामले में ३०० के आसपास ।


कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि तपी जमीन को कुछ ठंडक देने का काम हुआ , लेकिन विकासक्रम की द्रष्टि से अन्य भाषाओं की तुलना में बहुत संतोषप्रद नहीं कहा जा सकता । हिंदी ब्लोगिंग की सात वर्षों की इस यात्रा में अमूमन यही देखा गया कि यह ब्लॉगरों के लिए एक ऐसा धोबीघाट रहा ,जहां बैठकर वे अपने घर से लेकर गली-मोहल्ले तक की तमाम मैली चादरों को धोने का काम करते रहे और सुखाते रहे ।


दो अत्यंत दुखद बातें हुई हिंदी ब्लॉगजगत में । पहली यह कि ११ मई को ज्ञानदत्त पाण्डेय जी का विवादास्पद आलेख आया -कौन बेहतर ब्लॉगर है शुक्ल या लाल? फिर तो हिंदी ब्लॉगजगत में ऐसा घमासान मचा कि लगभग एक पखवारे तक हिंदी ब्लॉग जगत को संकटग्रस्त बनाए रखा ......राजीव तनेजा ने पूरी घटना को व्यंग्यात्मक लहजे में कुछ यूँ रखा -मुकद्दर का सिकंदर कौन ? दूसरी अत्यंत दु:ख की बात यह हुई कि इस वर्ष अचानक महावीर शर्मा जी का निधन हो गया । उनकी मृत्यु से हिंदी ब्लॉगजगत की अपूरणीय क्षति हुयी है इसमें कोई संदेह नहीं की हम सभी ने एक प्रेरक मार्गदर्शक को खो दिया ।इस वर्ष चिट्ठा चर्चा के माध्यम से होने वाली खेमेवाजी पर भी प्रश्न खड़े किये गए और अनूप शुक्ल जैसे प्रारंभिक ब्लोगर की कथित विवादास्पद टिप्पणियों पर भी छतीसगढ़ में चर्चा हुयी ब्लोगर मीट के दौरा. उस ब्लोगर मीट में चिट्ठा चर्चा के नाम से डोमेन लेने की भी बात हुयी ....पूरा प्रकरण पर नज़र डालने के लिए संजीत त्रिपाठी का यह पोस्ट देखें- कथन: विनीत, राजकुमार ग्वालानी, अनूप शुक्ल और झा जी के आलोक में यह पोस्ट -आइए कुछ बात करें अब छत्तीसगढ़ ब्लॉगर मी की रपट पर मिली टिप्पणियों पर। इनमें सबसे खास ध्यान देने लायक हैं विनीत कुमार, राजकुमार ग्वालानी और अनूप शुक्ल जी की। दरअसल ये टिप्पणी ही नहीं बल्कि पोस्टनुमा टिप्पणी हैं इसलिए इनकी चर्चा अलग से आवश्यक है। एकदम मुद्दे पर है। चिट्ठा चर्चा का डोमेन लेने के मुद्दे पर दिए गए ब्लॉग पोस्ट्स के अलावा मिसफ़िट, सारथी, अलबेला खत्री, बिना लाग लपेट के जो कहा जाए वही सच हैं, टिप्पणी चर्चा, ज़िम्दगी के मेले, कुछ भी कभी भी, मसिजीवी आदि पर आई पोस्ट पर भी नज़र डाली जा सकती है !


इस दौरान एक काम और हुआ -डा अरविन्द मिश्र के अनुसार - कुछ रुग्ण और व्यथित मानसिकता के लोगों ने मिलकर डॉ अरविन्द मिश्र की नारी विरोधी ,उद्दंड ,इमेज प्रोजेक्ट की और काफी हद तक सफल भी रहे ।

वर्ष-२०१० का जहां तक सवाल है यह महसूस किया गया कि ब्लोगिंग के तीब्र विस्तार से ब्लोगरों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती पैदा हुई है । इस बार यह भी महसूस किया गया हिंदी ब्लॉगजगत में कि ब्लॉग की विश्वसनीयता का मापदंड बनाया जाए ताकि सार्थक और निरर्थक ब्लॉगों में अंतर किया जा सके, पर ऐसा सोचने वालों के बिपरीत एक वर्ग ऐसा भी उभरा जो पूरी दृढ़ता के साथ यह बताने की बार-बार कोशिश की कि यह कतई संभव नहीं है, क्योंकि ब्लोगिंग दुनिया भर के नव साक्षरों के लिए यह एक अनूठी प्रयोगशाला है। ऐसा भला और कौन सा माध्यम है जहां आदमी बिना कोई बड़ी पूंजी खर्च किए किसी भी बड़ी हस्ती के साथ कंधा जोड़ कर खड़ा हो जाए? इसलिए इसे किसी नियम-क़ानून में नहीं बांधा जा सकता ...!


वर्ष-२०१० में हिंदी ब्लोगिंग के प्रति ज्यादा से ज्यादा रुझान पैदा करने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम चलाये गए । १६ वर्गों में सार्थक उपस्थिति दर्ज कराने वाले चर्चित ब्लोगरों के लिए तथा हिंदी ब्लोगिंग में सकारात्मक लेखन को बढ़ावा देने के लिए संवाद डोट कॉम ने संवाद सम्मान की घोषणा की । दो चिट्ठाकारों क्रमश: बसंत आर्य और ललित शर्मा को फगुनाहट सम्मान से नवाजा गया । ताऊ डोट इन के द्वारा बैशाखनंदन सम्मान की घोषणा की गयी । पहली बार इंटरनेट पर लोकसंघर्ष पत्रिका और परिकल्पना के द्वारा प्रायोजित ब्लॉग उत्सव मनाया गया । ब्लोगोत्सव-२०१० में सृजनात्मक उपस्थिति को आधार मानते हुए पहली बार किसी भाषा के ब्लॉग द्वारा ५१ ब्लोगरों के लिए एक साथ सारस्वत सम्मान (लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान -२०१० ) की उद्घोषणा की गयी । शिबना प्रकाशन के द्वारा इस वर्ष माह दिसंबर में ब्लोगर एवं गीतकार राकेश खंडेलवाल को सम्मानित करने की उद्घोषणा की गयी !

ललित शर्मा ने इस वर्ष सकारात्मक चिट्ठों की चर्चा के लिए ब्लॉग4 वार्ता आरंभ किया , वहीं चिट्ठा चर्चा पर अनूप शुक्ल, रवि रतलामी, डा अनुराग,मनोज कुमार, तरुण,मसिजीवी, चर्चा मंच पर डॉ.रुपचन्द्र शास्त्री "मयंक",मनोज कुमार , संगीता स्वरुप, वन्दना और ब्लोग४वार्ता पर ललित शर्मा,शिवम् मिश्रा, अजय झा, संगीता पुरी चर्चा हिंदी चिट्ठों की पर पंकज मिश्रा , समय चक्र पर महेंद्र मिश्र और झा जी कहीन पर अजय कुमार झा आदि के द्वारा लगातार चिट्ठों को प्रमोट करने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया ।इसी वर्ष लखनऊ ब्लोगर्स असोसिएशन के द्वारा अलवेला खत्री को चिट्ठा हास्य रत्न से अलंकृत करते हुए सम्मानित किया गया , वहीं संजीत त्रिपाठी को हिंदी ब्लोगिंग में उल्लेखनीय योगदान के लिए सृजगाथा ने सम्मानित किया । दो साल पहले चिट्ठाकारी से अस्थायी संन्यास लेकर चले गये ई -पंडित की इस वर्ष फरवरी माह में वापसी हुई । विनीत कुमार ने भी ब्लोगिंग में तीन वर्ष का सफ़र पूरा कर लिया । इस वर्ष हिंदी में एक बेहतर ब्लॉग "जानकी पूल" लेकर आये प्रभात रंजन । १५ जून को डा सुभाष राय ने हिंदी ब्लोगिंग की संभावनाओं और खतरों से आगाह किया ।इस वर्ष तीन महत्वपूर्ण ब्लॉग परिकल्पना के माध्यम से आये, हिंदी ब्लोगिंग के दस्तावेजीकरण हेतु ब्लॉग परिक्रमा , हिंदी जगत की गतिविधियों को प्राणवायु देने के उद्देश्य से शब्द सभागार तथा गीत-ग़ज़ल-कविता-नज़्म के क्षेत्र में सक्रिय नए -पुराने रचनाकारों को एक मंच प्रदान करने हेतु वटवृक्ष, यह ब्लॉग इंटरनेट की मशहूर कवियित्री रश्मि प्रभा के संचालन में सितंबर में शुरू हुआ और लोकप्रियता का नया मुकाम बनाने में सफल भी हुआ ।साहित्यांजलि के नाम से परिकल्पना की एक और पहल हुई इस वर्ष जिसके अंतर्गत साहित्यिक कृत्यों का प्रकाशन होगा । अभी इसपर रवीन्द्र प्रभात का नया उपन्यास " ताकि बचा रहे गणतंत्र " की कड़ियाँ प्रकाशित हो रही है ।अंधविश्वास के प्रति अपनी मुहीम के अंतर्गत जाकिर अली रजनीश इस वर्ष एक नया ब्लॉग लेकर आये जिसका नाम है सर्प संसार । लगभग एक दर्जन ब्लॉग के संचालक अविनाश वाचस्पति लेकर आये मैं आपसे मिलना चाहता हूँ और अजय कुमार झा ब्लॉग बकबक ।इस वर्ष मनोज कुमार का भी एक नया ब्लॉग विचार आया !इसी वर्ष कुअंर कुसुमेश का नया ब्लॉग भी आया, जो सृजनात्मक अभिव्यक्ति की सार्थक प्रस्तुति कही जा सकती है !



इस वर्ष बिभिन्न शहरों में काफी संख्या में ब्लोगर सम्मलेन और गोष्ठियां हुई ,२२ फरवरी को राँची में जमा हुए कलकतिया और झारखण्डी ब्लॉगर,अमिताभ मीत (कोलकाता),शिव कुमार मिश्रा (कोलकाता),बालकिशन (कोलकाता),शम्भू चौधरी (कोलकाता),रंजना सिंह (जमशेदपुर),श्यामल सुमन (जमशेदपुर),पारूल चाँद पुखराज (बोकारो),संगीता पुरी (बोकारो),मनीष कुमार (राँची),नदीम अख्तर (राँची),घनश्याम श्रीवास्तव उर्फ घन्नू झारखंडी (राँची),डॉ॰ भारती कश्यप (राँची),निराला तिवारी (राँची),संध्या गुप्ता (दुमका),सुशील कुमार (चाईंबासा),शैलेश भारतवासी (दिल्ली),लवली कुमारी (धनबाद),अभिषेक मिश्र (वाराणसी) आदि। १२ अप्रैल को लखनऊ में हास्यकवि अलवेला खत्री की उपस्थिति में उपस्थित हुए लखनऊ के ब्लोगर । लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन और संवाद डोट कौम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस ब्लोगर संगोष्ठी में श्रीमती अलका मिश्रा, श्रीमती सुशीला पुरी, श्रीमती उषा राय, श्रीमती अनीता श्रीवास्तव, श्री अमित कुमार ओम, श्रीमती मीनू खरे, श्री रवीन्द्र प्रभात, श्री मो० शुएब, श्री हेमंत, श्री विनय प्रजापति, श्री जाकिर अली रजनीश आदि ब्लोगर्स उपस्थित हुए ।२५ अप्रैल को मुम्बई ब्लोगर मीट का आयोजन हुआ, जिसमें विभारानी, बोधिसत्व, आभा मिश्रा, विमल कुमार, अभय तिवारी, राज सिंह, अनिल रघुराज, यूनुस खान, अनीता कुमार, घुघुती बासुती, ममता, जादू, रश्मि रविजा, विवेक रस्तोगी ने शिरकत की । २६ अगस्त को आगरा में अवीनाश वाचस्पति की अध्यक्षता में उपस्थित हुए आगरा और उसके आसपास के ब्लोगर,जयपुर हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन में तकनीक के एक नए पक्ष से परिचय हुआ अर्थात लिंक पर क्लिक करके आप टेलीफोन समाचार सुन भी सकते हैं। जयपुर में आयोजित पहले हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन का समाचार इस नए माध्‍यम से प्रसारित हुआ। ०६ जून को मेरठ में ब्लोगर्स गोष्ठी हुई जिसमें अबिनाश वाचस्पति, सुमित प्रताप सिंह, मिथिलेश दुबे आदि उपस्थित हुए । २२ मई को दिल्ली ब्लोगर मिलन का कार्यक्रम हुआ, जिसमें जय कुमार झा, रतन सिंह शेखावत, एम वर्मा, राजीव तनेजा, संगीता पुरी, विनोद कुमार पाण्डे, बागी चाचा, पी के शर्मा, ललित शर्मा, अमर ज्योति, अविनाश वाचस्पति, संजू तनेजा, मानिक तनेजा, मयंक सक्सेना, नीरज जाट, अंतर साहिल, मयंक, आशुतोष मेहता, शाहनवाज़ सिद्दिकी, राहुल राय, डाँ वेद व्यथित, राजीव रंजन प्रसाद, अजय यादव, अभिषेक सागर, डाँ प्रवीन चोपड़ा, प्रतिभा कुशवाहा, प्रवीण कुमार शुक्ला, खुशदीप सहगल, इरफान खान, योगेश कुमार गुलाटी, उमाशंकर मिश्रा, सुलभ जायसवाल, चंडीदत्त शुक्ल, राम बाबू सिंह, अजय कुमार झा, देवेन्द्र गर्ग, घनश्याम बघेला, सुधीर कुमार आदि उपस्थित हुए । १३ नवंबर को मशहूर ब्लोगर समीर लाल समीर के भारत आगमन पर दिल्ली में नुक्कड़ के संचालक अवीनाश वाचस्पति की अगुआई में उनका शानदार स्वागत हुआ । २१ नवंबर को रोहतक में ब्लोगर मीट हुए , जिसमें राज भाटिया, ललित शर्मा, अजय झा, खुशदीप सहगल, अंतर सोहिल , संगीता पुरी, शहनवाज़, नीरज जाट, संजय भास्कर, योगेन्द्र मौदगिल , राजीव तनेजा आदि उपस्थित हुए और ०१ दिसंबर को संस्कारधानी जबलपुर में जबलपुर ब्लागर्स द्वारा "हिंदी विकास और संभावनाएं" विषय पर संगोष्टी आयोजित की गई जिसमें रायपुर छत्तीसगढ़ से ललित शर्मा ,जी. के अवधिया , हैदराबाद से विजय कुमार सतपति और समीर लाल ( उड़न तश्तरी) उपस्थित हुए ।

किन्तु २७ अगस्त को पांच दिवसीय ‘ब्लॉग लेखन के द्वारा विज्ञान संचार‘ कार्यशाला का आयोजन लखनऊ में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौ्द्यौगिकी संचार परिषद, नई दिल्ली एवं तस्लीम के संयुक्त तत्वाधान में किया,बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर के पूर्व कुलपति एवं प्रसिद्ध शिक्षाविद श्री महेन्द्र सोढ़ा,साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन के अध्यक्ष डा0 अरविंद मिश्र,जाने पहचाने ब्लॉगर श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी, इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष डा0 वी0 पी0 सिंह,अमित ओम,ब्लॉग तकनीक के महारथी रवि रतलामी और शैलेष भारतवासी,“एक आलसी का चिठ्ठा” फेम के ब्लॉगर श्री गिरिजेश राव,राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद के निदेशक डा0 मनोज पटैरिया,जानी पहचानी ब्लॉगर अल्पना वर्मा,प्रख्यात रचनाकार हेमंत द्विवेदी, लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन के अध्यक्ष रवीन्द्र प्रभात, लोकसंघर्ष पत्रिका के रणधीर सिंह, सुमन, मोहम्मद शुएब, जीशान हैदर जैदी,अल्का मिश्रा,समाजसेवी ईं0 राम कृष्ण पाण्डेय और ‘तस्लीम’ के महामंत्री जाकिर अली ‘रजनीश’की उपस्थिति रही। देश में पहली बार सांस ब्लोगिंग पर आधारित इस प्रकार के आयोजन हुए । ९ -१० अक्तूबर को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के द्वारा ब्लोगिंग की आचार संहिता पर हुई दो दिवसीय संगोष्ठी को इस वर्ष की महत्वपूर्ण गतिविधियाँ कही जा सकती है । ९ अक्टूबर को 'हिंदी ब्लॉगिंग की आचार-संहिता' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं संगोष्ठी का उद्‍घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति श्री विभूति नारायण राय ने किया।संगोष्ठी में उदयपुर,राजस्थान से पधारीं डॉ.(श्रीमती) अजित गुप्ता,``दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा'' के विश्वविद्यालय विभाग के हैदराबाद केंद्र के विभागाध्यक्ष और प्रोफ़ेसर डॉ. ऋषभ देव शर्मा,वरिष्ठ कवि श्री आलोकधन्वा,जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल राय ‘अंकित’,‘चिट्ठा चर्चा’ के संचालक व लोकप्रिय ‘फुरसतिया’ ब्लॉग के लेखक अनूप शुक्ल, लखनऊ से रवीन्द्र प्रभात, जाकिर अली रजनीश ,भड़ास4मीडिया डॉट कॉम’ के यशवंत सिंह, हिंद युग्म के शैलेश भारतवासी ,अहमदाबाद से आये संजय वेंगाणी, उज्जैन से पधारे सुरेश चिपलूनकर, पानीपत से विवेक सिंह, दिल्ली से हर्षवर्धन त्रिपाठी,दिल्ली से हीं अवीनाश वाचस्पति, मेरठ से अशोक कुमार मिश्र, वर्धा से श्रीमती रचना त्रिपाठी, सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी,दिल्ली से विनोद शुक्ल,मुम्बई से श्रीमती अनिता कुमार, बंगलोर से प्रवीण पांडेय, कोलकाता से डॉ. प्रियंकर पालीवाल, छतीसगढ़ से संजीत त्रिपाठी, डॉ.महेश सिन्हा तथा प्रमुख ब्लॉगर और आप्रवासी कवयित्री डॉ. कविता वाचक्नवी आदि उपस्थित थे। पहली बार हिंदी ब्लोगिंग की किसी सार्वजनिक संगोष्ठी में देश के प्रमुख साईबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल उपस्थित हुए ।
ब्लोगिंग में ठलुआते हुए प्रमोद तांबट का एक साल पूरा हुआ इस वर्ष और पहले ही वर्ष में वे ब्लोगोत्सव-२०१० में शामिल भी हुए और सम्मानित भी । विगत वर्ष हिंदी ब्लोगिंग में लालू प्रसाद यादव और मनोज बाजपाई जैसी बिहार की चर्चित हस्तियाँ शामिल हुई थी, इस वर्ष नितीश कुमार का भी ब्लॉग आया

अभी तक आप ब्लॉग लिखते रहे हैं, माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के जरिए १४० अक्षरों में अपनी बात कहते रहे हैं, सेलेब्रिटी को फॉलो कर उनके दिल की बात जानते रहे हैं, फेसबुक-ऑकरुट जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर स्टेटस अपडेट कर अपना हाल दुनिया को बताते रहे हैं या अपने दोस्तों-परीचितों का हाल जानते रहे हैं। लेकिन, वर्ष -२००९ में ब्लॉगिंग की दुनिया में मीठी आवाज का रस घुलना शुरू हुआ और इस वर्ष की समाप्ति तक पूरे परवान पर है यह ‘वॉयस ब्लॉगिंग’ की दुनिया।

ज्ञान दत्त पाण्डेय ने मानसिक हलचल पर १५ जनवरी २०१० को अपने पोस्ट में ब्लोगिंग की सीमाएं बतायी है वहीं इस आलेख की प्रतिक्रया में समीर लाल समीर का कहना है कि " वेब तो दिन पर दिन स्मार्ट होता ही जा रहा है, जरुरत है हमारे कदम ताल मिलाने की. जितना तेजी से मिल पायेंगे, उतनी ज्याद उपयोगिता सिद्ध कर पायेंगे.माला भार्गव के आलेख के लिंक के लिए अति आभार !"

१२ मार्च २०१० को परिकल्पना पर यह महत्वपूर्ण घोषणा की गयी कि हिंदी ब्लॉग जगत को आंदोलित करने के उद्देश्य से परिकल्पना ब्लॉग उत्सव का आयोजन किया जाएगा । यह आयोजन १६ अप्रैल२०१० को शुरू हुआ हिंदी के मशहूर चित्रकार इमरोज के साक्षात्कार , हिंदी ग़ज़लों के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर अदम गोंडवी की ग़ज़लों, देश के प्रमुख व्यंग्यकार अशोक चक्रधर की शुभकामनाओं से । अंतरजाल पर यह आयोजन लगभग दो महीनों तक चला ।इस उत्सव का नारा था - " अनेक ब्लॉग नेक हृदय " । इस उत्सव में प्रस्तुत की गयी कतिपय कालजयी रचनाएँ , विगत दो वर्षों में प्रकाशित कुछ महत्वपूर्ण ब्लॉग पोस्ट , ब्लॉग लेखन से जुड़े अनुभवों पर वरिष्ठ चिट्ठाकारों की टिप्पणियाँ ,साक्षात्कार , मंतव्य आदि ।विगत वर्ष-२००९ में ब्लॉग पर प्रकाशित कुछ महत्वपूर्ण कवितायें, गज़लें , गीत, लघुकथाएं , व्यंग्य , रिपोर्ताज, कार्टून आदि का चयन करते हुए उन्हें प्रमुखता के साथ ब्लॉग उत्सव के दौरान प्रकाशित किये गए ।कुछ महत्वपूर्ण चिट्ठाकारों की रचनाओं को स्वर देने वाले पुरुष या महिला ब्लोगर के द्वारा प्रेषित ऑडियो/वीडियो भी प्रसारित किये गए ।उत्सव के दौरान प्रकाशित हर विधा से एक-एक ब्लोगर का चयन कर , गायन प्रस्तुत करने वाले एक गायक अथवा गायिका का चयन कर तथा उत्सव के दौरान सकारात्मक सुझाव /टिपण्णी देने वाले श्रेष्ठ टिप्पणीकार का चयन कर उन्हें सम्मानित किया गया । साथ ही हिन्दी की सेवा करने वाले कुछ वरिष्ठ चिट्ठाकारों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया । पहली बार एक साथ लगभग ५० ब्लोगरों को लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से नवाज़ा गया
इसी दौरान ताऊ ने बुढाऊ ब्लागर एसोसियेशन की स्थापना कर दी हुक्का गुड गुड़ाते हुए ........ कौन कौन बुढाऊ ब्लागर वहां पहुचे ये देखिये.......लखनऊ ब्लोगर असोसिएशन के तर्ज पर इस वर्ष कानपुर ब्लोगर असोसिएशन, आजमगढ़ ब्लोगर असोसिएशन और जूनियर ब्लोगर असोसिएशन की भी स्थापना हुई ।

बी एस पावला , हिंदी ब्लॉगजगत के सबसे जिंदादिल ब्लोगर, जिन्हें संवाद डोट कॉम ने वर्ष-२००९ का ब्लॉग संरक्षक का सम्मान दिया । १७ जून २०१० के अपने पोस्ट में उन्होंने कहा है कि -"ब्लॉगिंग की दुनिया में एक अनोखा ब्लॉग-संकलक, एग्रीगेटर कर रहा आपका इंतज़ार" बी एस पावला के द्वारा संचालित 'प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा HEADLINE ANIMATOR' इस वर्ष योजनाबद्ध तरीके से निष्क्रिय किया गया । प्रिंट मीडिया ब्लॉग को ही वेबसाईट का रूप दे कर http://www.blogsinmedia.com/बनाया गया है।अपने कथन के अनुसार बी एस पावला ने इसे कार्य रूप में परिवर्तित भी किया,जो इस वक्त यह सरपट चल रहा http://www.blogsinmedia.com/


व्यंग्य वर्ग से लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान-२०१० पाने वाले अविनाश वाचस्पतिने २६ अप्रैल २०१० को ब्लोगोत्सव-२०१० पर एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि " हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग की ताकत को कम करके आंकना बिल्‍कुल ठीक नहीं है "

०५ मई २०१० को मुहल्ला लाईव पर विनीत कुमार ने कहा कि " ज्ञानोदय में हिंदी ब्लोगिंग पर शुरू हुआ उनका स्तंभ " । अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी करते हुए आलेख में उन्होंने कहा है कि -"ब्लॉग के बहाने पहले तो वर्चुअल स्पेस में और अब प्रिंट माध्यमों में एक ऐसी हिंदी तेजी से पैर पसार रही है जो कि देश के किसी भी हिंदी विभाग की कोख की पैदाइश नहीं है। पैदाइशी तौर पर हिंदी विभाग से अलग इस हिंदी में एक खास किस्म का बेहयापन है, जो पाठकों के बीच आने से पहले न तो नामवर आलोचकों से वैरीफिकेशन की परवाह करती है और न ही वाक्य विन्यास में सिद्धस्थ शब्दों की कीमियागिरी करनेवाले लोगों से अपनी तारीफ में कुछ लिखवाना चाहती है। पूरी की पूरी एक ऐसी पीढ़ी तैयार हो रही है जो निर्देशों और नसीहतों से मुक्त होकर हिंदी में कुछ लिख रही है। इतनी बड़ी दुनिया के कबाड़खाने से जिसके हाथ अनुभव का जो टुकड़ा जिस हाल में लग गया, वह उसी को लेकर लिखना शुरू कर देता है। इस हिंदी को लिखने के पीछे का सीधा-सा फार्मूला है जो बात जैसे दिल-दिमाग के रास्ते कीबोर्ड पर उतर आये उसे टाइप कर डालो, भाषा तो पीछे से टहलती हुई अपने-आप चली आएगी।"


"जबसे ब्लोगिंग की लत लगी है हमको, हमेशा परेशान रहते हैं। ना दिन में चैन और ना रात में नींद। दिमाग रूपी आकाश में ब्लोग, ब्लोगर, पोस्ट, टिप्पणियाँ रूपी मेघ ही घुमड़ते रहते हैं। परेशान रहा करते हैं कि आज तो ले-दे के पोस्ट लिख लिया है हमने पर कल क्या लिखेंगे? कई बार मन में आता है कि कल से हर रोज लिखना बंद। निश्चय कर लेते हैं कि आज के बाद से अब सप्ताह में सिर्फ एक या दो पोस्ट लिखेंगे पर ज्योंही आज बीतता है और कल है कि है। तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा और अंगुष्ठ याने कि सारी की सारी उँगलियाँ रह-रह कर कम्प्यूटर के कीबोर्ड की ओर जाने लगती हैं। जब तक एक पोस्ट ना लिख लें, चैन ही नहीं पड़ता। पर रोज-रोज आखिर लिखें तो लिखें भी क्या? " यह मैं नहीं कह रहा हूँ ऐसा कहा है जी के अवधिया ने अपने ब्लॉग धान के देश में पर १२ जुलाई २०१० को "बड़ी बुरी लत है ब्लोगिंग की "

१४ अगस्त २०१० को अफलातून ने यही है वह जगह पर "ब्लॉगिंग के चार साल : आंकड़ों में " प्रस्तुत किया है ।

छींटे और बौछारें पर ०४ नवंबर २०१० को रवि रतलामी ने टेक्नोराती ब्लॉग सर्वे का व्योरा प्रस्तुत किया है और कहा है कि "टेक्नोराती ब्लॉग सर्वे 2010 आंकड़े - क्या ब्लॉगिंग पुरूषों की बपौती है?"....

२५ फरवरी को उड़न तश्तरी पर प्रकाशित ऑपरेशन कनखुजरा में मनुष्य और बाघ को लेकर की गयी टिप्पणी को पाठकों ने काफी सराहा । वहीँ डा अनवर जमाल के द्वारा ०२ अगस्त को मन की दुनिया पर कथा के दर्पण में सच को प्रतिबिम्बित करने का एक अनूठा प्रयास किया गया । ०१ अप्रैल मुर्ख दिवस पर शरद कोकाश ने व्यंग्य के माध्यम से ब्लोगिंग से जुड़े महत्वपूर्ण पहलूओं पर प्रकाश डाला , शीर्षक था -बाल (ब्लॉग ) ना बाँका कर सके जो जग बैरी होय....२९ अप्रैल को नन्ही ब्लोगर पाखी ने चिड़िया टापू की सैर के माध्यम से एक सुन्दर यात्रा वृत्तांत प्रस्तुत किया । २७अगस्त को सफ़ेद घर पर ब्लॉग महंत...........ब्लॉगिंग का ककहरा पढ़ते मिस्टर मदन.......आलू का जीजा........ढेला ढोवन.......सतीश पंचम का व्यंग्य आया जिसे पाठकों ने काफी सराहा वहीँ ३१ अगस्त को सरस पायस पर सूर्य कुमार पाण्डेय की एक बहुत ही सारगर्भित कविता प्रकाशित हुई ।१६ अगस्त को भला बुरा ब्लॉग ने ५०० वीं पोस्ट लिखी । २७ अक्तूबर को मैं मुरख तुम ज्ञानी पर वर्धा सम्मलेन का पोस्टमार्टम किया गया। १८ नवंबर को स्वास्थ सबके लिए पर ब्लोगिंग और तनाव से संबंधित महत्वपूर्ण पहलूँ को उकेरा ।
१६ मार्च कोंविवेक सिंह न ब्लोगिंग कों पत्र लिख कर कहा कि उदास मत हो ब्लोगिंग । ०९ अप्रैल को मा पलायनम पर मनोज मिश्र ने मित्र मिलन की अजब कहानी से अवगत कराया । ११ अप्रैल को ब्लोग्स पंडित ने जी -८ से ब्लॉग जगत में एक नयी क्रान्ति से पाठकों को रूबरू कराया ।३१ जुलाई को प्रवीण जाखर ने कहा कि साइबर सुरक्षा खतरे में : एक्सक्लूसिव पड़ताल २१ अगस्त को डायरी में मनीषा पाण्डेय नकसबे में बसे रबीश कुमार की चर्चा की । एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण करते हुए आशीष खंडेलवाल ने हिंदी ब्लॉग टिप्स पर 100 से ज़्यादा फॉलोवर वाले हिन्दी चिट्ठों के शतक की जानकारी दी । १७ जुलाई को जानकी पूल पर मनोहर श्याम जोशी की बातचीत प्रकाशित की गयी । सृजन यात्रा में सुभाष नीरव ने अपनी सृजनात्मक यात्रा से अवगत कराया । राजीव तनेजा ने हंसते रहो पर अत्यंत सारगर्भित व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए कहा है कि हे पार्थ!...अर्जुन गाँडीव उठाए तो किसके पक्ष में?...दिव्य नर्मदा ने ब्लोगिंग की आचार संहिता : कुछ सवाल उठाये हैं ।

१८ नवंबर को दबीर निउज ने अपने एक आलेख में बताया कि फेसबुक की लोकप्रियता 5 साल की मेहमान ....०३ दिसंबर को अपने एक आलेख में भारतीय नागरिक ने यह सूचना दी कि अभी तीन दिन पहले तक wikileaks.org ठीक-ठाक ढ़ंग से खुल रही थी। लेकिन आज यह साइट नहीं खुल पा रही। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस साइट को प्रतिबन्धित कर दिया गया है।

.........वर्ष-२०१० में जो कुछ भी हुआ उसे हिंदी चिट्ठाजगत ने किसी भी माध्यम की तुलना में बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने की पूरी कोशिश की है। कुछ ब्लॉग ऐसे है जिनकी चर्चा विगतवर्ष-२००९ में भी हुयी थी और आशा की गई थी की वर्ष- २०१० में इनकी चमक बरक़रार रहेगी । सिनेमा पर आधारित तीन ब्लॉग वर्ष-२००९ में शीर्ष पर थे । एक तरफ़ तो प्रमोद सिंह के ब्लॉग सिलेमा सिलेमा पर सारगर्भित टिप्पणियाँ पढ़ने को मिलीं थी वहीं दिनेश श्रीनेत ने इंडियन बाइस्कोप के जरिये निहायत ही निजी कोनों से और भावपूर्ण अंदाज से सिनेमा को देखने की एक बेहतर कोशिश की थी । तीसरे ब्लॉग के रूप में महेन के चित्रपट ब्लॉग पर सिनेमा को लेकर अच्छी सामग्री पढ़ने को मिली थी । यह अत्यन्त सुखद है की उपरोक्त तीनों ब्लोग्स में से महेन के चित्रपट को छोड़कर शेष दोनों ब्लोग्स वर्ष २०१० में भी अपनी चमक और अपना प्रभाव बनाये रखने में सफल रहे हैं ।


इसीप्रकार जहाँ तक राजनीति को लेकर ब्लॉग का सवाल है तो अफलातून के ब्लॉग समाजवादी जनपरिषद, नसीरुद्दीन के ढाई आखर, अनिल रघुराज के एक हिन्दुस्तानी की डायरी, अनिल यादव के हारमोनियम, प्रमोदसिंह के अजदक और हाशिया का जिक्र किया जाना चाहिए। ये सारे ब्लोग्स वर्ष २००९ में भी शीर्ष पर थे और वर्ष २०१० में अनियमितता के बावजूद शीर्ष पर न सही किन्तु अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल जरूर हुए हैं ।

वर्ष २००९ में सृजनात्मक ब्लोग्स की श्रेणी में सुरपेटी, कबाड़खाना, ठुमरी, पारूल चाँद पुखराज का चर्चित हुए थे , जिनपर सुगम संगीत से लेकर क्लासिकल संगीत को सुना जा सकता था , पिछले वर्ष रंजना भाटिया का ब्लॉग ने भी ध्यान खींचा था और जहाँ तक खेल का सवाल है, एनपी सिंह का ब्लॉग खेल जिंदगी है पिछले वर्ष शीर्ष पर था। पिछले वर्ष वास्तु, ज्योतिष, फोटोग्राफी जैसे विषयों पर भी कई ब्लॉग शुरू हुए थे और आशा की गई थी कि ब्लॉग की दुनिया में २०१० ज्यादा तेवर और तैयारी के साथ सामने आएगा। यह कम संतोष की बात नही कि इस वर्ष भी उपरोक्त सभी ब्लोग्स सक्रीय ही नही रहे अपितु ब्लॉग जगत में एक प्रखर स्तंभ की मानिंद दृढ़ दिखे । निश्चित रुप से आनेवाले समय में भी इनके दृढ़ता और चमक बरकरार रहेगी यह मेरा विश्वास है ।

यदि साहित्यिक लघु पत्रिका की चर्चा की जाए तो पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ज्यादा धारदार दिखी मोहल्ला । अविनाश का मोहल्ला कॉलम में चुने ब्लॉगों पर मासिक टिप्पणी करते हैं और उनकी संतुलित समीक्षा भी करते हैं। इसीप्रकार वर्ष २००९ की तरह वर्ष-२०१० में भी अनुराग वत्स के ब्लॉग ने एक सुविचारित पत्रिका के रूप में अपने ब्लॉग को आगे बढ़ाया हैं।

पिछले वर्ष ग्रामीण संस्कृति को आयामित कराने का महत्वपूर्ण कार्य किया था खेत खलियान ने , वहीं विज्ञान की बातों को बहस का मुद्दा बनाने सफल हुए थे पंकज अवधिया अपने ब्लॉग मेरी प्रतिक्रया में । हिन्दी में विज्ञान पर लोकप्रिय और अरविन्द मिश्रा के निजी लेखों के संग्राहालय के रूप में पिछले वर्ष चर्चा हुयी थी सांई ब्लॉग की ,गजलों मुक्तकों और कविताओं का नायाब गुलदश्ता महक की ,ग़ज़लों एक और गुलदश्ता है अर्श की, युगविमर्श की , महाकाव्य की, कोलकाता के मीत की , "डॉ. चन्द्रकुमार जैन " की, दिल्ली के मीत की, "दिशाएँ "की, श्री पंकज सुबीर जी के सुबीर संवाद सेवा की, वरिष्ठ चिट्ठाकार और सृजन शिल्पी श्री रवि रतलामी जी का ब्लॉग “ रचनाकार “ की, वृहद् व्यक्तित्व के मालिक और सुप्रसिद्ध चिट्ठाकार श्री समीर भाई के ब्लॉग “ उड़न तश्तरी “ की, " महावीर" " नीरज " "विचारों की जमीं" "सफर " " इक शायर अंजाना सा…" "भावनायें... " आदि की।इस वर्ष हिंदी ब्लोगिंग को नयी दिशा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में श्रेष्ठ सहयोगी की भूमिका में दिखे एडवोकेट रंधीर सिंह सुमन यानी इस वर्ष की उनकी गतिविधिया को nice कहा जा सकता है ! फिल्म अभिनेता सलमान खान की तरह सलीम खान भी इस वर्ष लगातार विवादों में घिरे रहे, इसके बावजूद वे अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए संवाद सम्मान और लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान ससे नवाजे गए !


इसी क्रम में हास्य के एक अति महत्वपूर्ण ब्लॉग "ठहाका " हिंदी जोक्स तीखी नज़र current CARTOONS बामुलाहिजा चिट्ठे सम्बंधित चक्रधर का चकल्लस और बोर्ड के खटरागी यानी अविनाश वाचस्पति तथा दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान- पत्रिका आदि की । वर्ष २००९ के चर्चित ब्लॉग की सूची में और भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग जैसे जबलपुर के महेंद्र मिश्रा के निरंतर अशोक पांडे का -“ कबाड़खाना “ , डा राम द्विवेदी की अनुभूति कलश , योगेन्द्र मौदगिल और अविनाश वाचस्पति के सयुक्त संयोजन में प्रकाशित चिट्ठा हास्य कवि दरबार , उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के प्रवीण त्रिवेदी का “ प्राइमरी का मास्टर , लोकेश जी का “अदालत “ , बोकारो झारखंड की संगीता पुरी का गत्यात्मक ज्योतिष , उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर सकल डीहा के हिमांशु का सच्चा शरणम , विवेक सिंह का स्वप्न लोक , शास्त्री जे सी फ़िलिप का हिन्दी भाषा का सङ्गणकों पर उचित व सुगम प्रयोग से सम्बन्धित सारथी , ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल और दिनेशराय द्विवेदी का तीसरा खंबा आदि की चर्चा वर्ष -२००९ में परिकल्पना पर प्रमुखता के साथ हुयी थी और हिंदी ब्लॉगजगत के लिए यह अत्यंत ही सुखद पहलू है , की ये सारे ब्लॉग वर्ष-२०१० में भी अपनी चमक बनाये रखने में सफल रहे हैं । ...!

जून-२००८ से हिंदी ब्लॉगजगत में सक्रिय के. के. यादव का वर्ष-२०१० में प्रकाशित एक आलेख अस्तित्व के लिए जूझते अंडमान के आदिवासी ,वर्ष-२००८ से दस ब्लोगरों क्रमश: अमित कुमार यादव, कृष्ण कुमार यादव, आकांक्षा यादव, रश्मि प्रभा, रजनीश परिहार, राज यादव, शरद कुमार, निर्मेश, रत्नेश कुमार मौर्या, सियाराम भारती, राघवेन्द्र बाजपेयी के द्वारा संचालित सामूहिक ब्लॉग युवा जगत पर इस वर्ष प्रकाशित एक आलेख हिंदी ब्लागिंग से लोगों का मोहभंग ,२४ जून २००९ से सक्रीय और लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित वर्ष की श्रेष्ठ नन्ही ब्लोगर अक्षिता पाखी के ब्लॉग पर प्रकाशित आलेख डाटर्स-डे पर पाखी की ड्राइंग... १० नवम्बर-२००८ से सक्रीय राम शिव मूर्ति यादव का इस वर्ष प्रकाशित आलेख मानवता को नई राह दिखाती कैंसर सर्जन डॉ. सुनीता यादव, २६ अगस्त -२००८ से सक्रीय सामूहिक ब्लॉग साहित्य शिल्पी (जिसके मुख्य संचालक हैं राजिव रंजन प्रसाद ) पर इस वर्ष प्रकाशित पोस्ट बस्तर के वरिष्ठतम साहित्यकार लाला जगदलपुरी से बातचीत ,दिसंबर-२००८ से सक्रीय ब्लोगर त्रिपुरारी कुमार शर्मा का ब्लॉग तनहा फलक पर प्रकाशित पोस्ट हिंदुस्तान की हालत ,जनवरी-२००८ से सक्रीय राम कुमार त्यागी के कविता संग्रह पर प्रकाशित पोस्ट अकेला हूँ तो क्या हुआ ? , मेरी आवाज़ पर प्रकाशित आलेख पश्चताप, गान्धी और मेरे पिता, शोध का सोच और आत्मनिर्भरत पर प्रभाव ,२० जनवरी -२०१० में मनोज कुमार, संगीता स्वरूप, रेखा श्रीवास्तव, अरुण चन्द्र राय, संतोष गुप्ता, परशुराम राय, करण समस्ती पुरी, हरीश प्रकाश गुप्त आदि ब्लोगर के सामूहिक संचालन में प्रकाशित ब्लॉग राजभाषा पर प्रकाशित पोस्ट आम आदमी की हिंदी प्रयोजनमूलक हिंदी के ज़रिए ,सितंबर-२००९ से सक्रीय लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान /बैसाखनंदन सम्मान से सम्मानित ब्लोगर मनोज कुमार का पोस्ट फ़ुरसत में … बूट पॉलिश!,मई-२००७ से सक्रीय वन्दना गुप्ता का वर्ष-२०१० में प्रकाशित आलेख :"पिता का योगदान" और "राष्ट्रमंडल खेलों का असर ?" ,अप्रैल- २००९ से सक्रीय और लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित शिखा वार्शनेय का आलेखक्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय.२१ सितंबर-२००८ से सक्रीय रेखा श्रीवास्तव के अपने ब्लॉग पर वर्ष-२०१० में प्रकाशित एक आलेख का शीर्षक और यू आर एल .....किसी की आँख का आंसूं! आदि को पाठकों की सर्वाधिक सराहना प्राप्त हुयी है .

हिन्दी ब्लॉगिंग में “एकल” लिखने वालों तथा यदि इसमें “समूह” ब्लॉग भी जोड़ दिया जाये तो, फ़िलहाल “1000 सब्स्क्राइबर क्लब” के सदस्य गिने-चुने ही हैं, लेकिन जिस रफ़्तार से हिन्दी ब्लॉगरों की संख्या बढ़ रही है और पाठकों की संख्या भी तेजी से विस्तार पा रही है, जल्दी ही 1000 सब्स्क्राइबर की संख्या बेहद मामूली लगने लगेगी और जल्दी ही कई अन्य ब्लॉगर भी इसे पड़ाव को पार करेंगे।०६ दिसम्बर के अपने पोस्ट में सुरेश चिपलूनकर ने कहा है कि महाजाल ब्लॉग के 1000 सब्स्क्राइबर हो गये हैं।
हिंदी ब्लोगिंग को प्राणवायु देने के उद्देश्य से चिट्ठाजगत लगातार सक्रिय रहा इस वर्ष भी, किन्तु हिंदी के बहुचर्चित एग्रीगेटर ब्लोगवाणी का अचानक बंद हो जाना इस वर्ष की महत्वपूर्ण घटना है, ब्लोगवाणी के बंद होने के पश्चात हमारीवाणी आयी, जिसका उद्देश्य है हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओँ तथा विदेशी भाषाओँ में लिखने वाले भारतियों को अपनी आवाज़ रखने के लिए एक उचित मंच उपलब्ध करना तथा भारतीय भाषाओँ तथा लेखन को एक नई सोच के साथ प्रोत्साहित करना, क्योंकि हमारीवाणी का उद्देश्य लेखकों के लिए अपना ब्लॉग संकलक उपलब्ध करना है, तो इसमें सबसे अधिक ध्यान इस बात पर है कि लेखकों की भावनाओं का पूरा ख्याल रखाजाए । इसीवर्ष इन्डली भी आयी और इसने भी भारतीय ब्लॉग को प्रमोट करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है । इसके अतिरिक्त छोटे-छोटे समूह में http://www.feedcluster.com/ के सहयोग से कई छोटे-छोटे एग्रीगेटर भी कार्यरत है जैसे - आज का हस्ताक्षर, परिकल्पना समूह,महिलावाणी, अपनी वाणी, अपनी माटी , लक्ष्य आदि । हलांकि जिस दृढ़ता के साथ ब्लॉग प्रहरी का आगमन हुआ , वह हिंदी ब्लॉगजगत में लंबी रेस का घोड़ा नहीं बन सका ।

-रवीन्द्र प्रभात
परिकल्पना ब्लॉग से साभार
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