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» » » » पहाड़ से पहाड़ की यात्रा

                                        
शिमला की मध्य पहाड़ियां हों
या हो काँगड़ा की धोलाधर पहाड़ियां
क्या फर्क है
मझे तो
मैदानों
घाटियों
नदी-नालों
और
खाईयों को पार करके
बस
पहाड़ से पहाड़ तक का
सफ़र तय करना है
और
जीवन भर खोजना है
केवल
यही एक सत्य क़ि
पहाड़ आखिर
जमीन होते हुए भी
जमीन से ऊँचा क्यों है
और आसमान छुते हुए भी
जमीन से जुड़ा क्यों है
इन प्रश्नों का उत्तर
इतना सरल नहीं क़ि
भूगोल क़ि एक किताब उठाकर
तुम कह दो क़ि
पहाड़
काश्मीर से आसाम तक
फ़ैली एक
हिमालय पर्वत श्रीन्खला है
जिसकी सबसे ऊँची छोटी
मौन्तेव्रेस्ट ८८४८ मीटर ऊँची है
ये प्रश्न का कोई
वांच्छित उत्तर नहीं है
प्रश्न तो यह है क़ि
जमीन से जुड़े रहते हुए भी
आसमान को कैसे छुआ जाता है
और
जमीन होते हुए भी
पहाड़ कैसे बना जाता है
प्रश्न का उत्तर केवल पहाड़ से पहाड़ क़ि यात्रा है
और
यात्री क़ि हर सांस
उसका अदम्य विश्वास
और चोटि उसकी
इस विश्वस्त यात्रा का
वेह चरम बिंदु
जहां वेह
जमीन
आसमान
और
पहाड़ क़ि यात्रा के सुख को
एकाकार रूप
देखता
और
महसूस करता है
फिर एकसाथ
और
यही
पहाड़ से पहाड़ तक क़ि
परमसुख्दायी यात्रा का अंत
और
यात्रा ज़ारी है !
                                            -अश्विनी रमेश
                                             (मेरे कविता संग्रह "जमीन से जुड़े आदमी का दर्द "से उधृत चर्चित कविता)

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