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लो क सं घ र्ष !: वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण-२०१० ( भाग-६ )

7.1.110 पाठकों के सुझाव और विचार

गतांक से आगे बढ़ते हुए ...

जैसे किसी आईने को आप भले ही सोने के फ्रेम में मढ़ दीजिये वह फिर भी झूठ नहीं बोलता । सच ही बोलता है । ठीक वैसे ही कुछ ब्लोग्स हैं हिंदी ब्लॉगजगत में जो हर घटना, हर गतिविधि , हर योजना का सच बयान करते मिलते हैं । वह घटना चाहे किसी छोटी जगह की हो या किसी बड़ी जगह की , चाहे दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलोर, लखनऊ , पटना की हो अथवा सुदूर गौहाटी, डिब्रूगढ़ या सिक्किम में गंगटोक की हो । आपको हर जगह का सचित्र ब्योरा अवश्य मिलेगा उन ब्लोग्स में ।

कहा जाता है कि भारत वर्ष विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों का देश है । सच है । पर इसका एक साथ मेल देखना हो तो रांची निवासी मनीष क़ुमार के ब्लॉग मुसाफिर हूँ यारों पर देख सकते हैं । अप्रैल -२००५ से सक्रिय हिंदी ब्लोगिंग में कार्यरत मनीष क़ुमार का यह ब्लॉग वर्ष-२००८ में आया है और अपनी सारगर्भित अभिव्यक्ति तथा सुन्दर तस्वीरों के माध्यम से हिंदी ब्लॉगजगत में सार्थक उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब हुआ है । इन्हें वर्ष-२००९ का संवाद सम्मान प्रदान किया जा चुका है । सुखद संस्मरणों के गुलदस्ता के रूप में इनका दूसरा ब्लॉग एक शाम मेरे नाम काफी चर्चित है ।


मनीष क़ुमार की तरह ही हिंदी ब्लॉगजगत में एक और घुमक्कर हैं नीरज जाट , जिनका ब्लॉग है मुसाफिर हूँ यारों । आप क्या पढ़ना चाहेंगे यात्रा वृत्तांत, इतिहास, मूड फ्रेश या रेल संस्मरण सब कुछ मिलेगा आपको इस ब्लॉग में । नीरज जाट का अपने बारे में कहना है कि -"घुमक्कडी जिंदाबाद ... घुमक्कडी एक महंगा शौक है। समय खपाऊ और खर्चीला। लेकिन यहां पर आप सीखेंगे किस तरह कम समय और सस्ते में बेहतरीन घुमक्कडी की जा सकती है। घुमक्कडी के लिये रुपये-पैसे की जरुरत नहीं है, रुपये -पैसे की जरुरत है बस के कंडक्टर को, जरुरत है होटल वाले को। अगर यहीं पर कंजूसी दिखा दी तो समझो घुमक्कडी सफल है।"


डा.सुभाष राय इस वर्ष हिंदी ब्लोगिंग के समर्पित व सक्रिय विद्यार्थियों में से एक रहे हैं...निरंतर सीखते जाना और जीवन को समझना ही इनका लक्ष्य रहा हैं । यह हम सभी के लिए वेहद सुखद विषय है कि वे ब्लोगिंग के माध्यम से अपने अर्जित ज्ञान को बांटने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं ...... ब्लोगोत्सव-२०१० पर प्रकाशित इनके आलेख : जाति न पूछो साध की को आधार मानते हुए ब्लोगोत्सव की टीम ने इन्हें वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (पुरुष ) का खिताब देते हुए सम्मानित किया हैं । प्रयाग के नार्दर्न इंडिया पत्रिका ग्रुप में सेवा शुरू करके तीन दशकों की इस पत्रकारीय यात्रा में अमृत प्रभात, आज, अमर उजाला , डी एल ए (आगरा संस्करण ) जैसे प्रतिष्ठित दैनिक समाचारपत्रों में शीर्ष जिम्मेदारियां संभालने के बाद इस समय लखनऊ में जन सन्देश (हिंदी दैनिक ) में मुख्य संपादक के पद पर कार्यरत, इनके प्रमुख ब्लॉग हैं -बात बेबात और साखी


न्याय और न्याय की धाराएं इतनी पेचीदा हो गयी है , कि अदालत का नाम सुनकर व्यक्ति एकबार काँप जाता है जरूर क्योंकि बहुत कठिन है इन्साफ पाने की डगर । हमारा मकसद यहाँ न तो न्यायपालिका पर ऊंगली उठाने का है और न ही किसी की अवमानना का । पर यह कड़वा सच है की हमारी प्रक्रिया इतनी जटिल हो गयी है की इन्साफ का मूलमंत्र उसमें कहीं खोकर रह गया है। आदमी को सही समय पर सही न्याय चाहकर भी नही मिल पाता। ऐसे में अगर कोई नि:स्वार्थ भाव से आपको क़ानून की पेचीदिगियों से रू-ब-रू कराये और क़ानून की धाराओं के अंतर्गत सही मार्ग दर्शन दे तो समझिये सोने पे सुहागा । ऐसा ही इक ब्लॉग है – तीसरा खम्बा. ब्लोगर हैं कोटा राजस्थान के दिनेश राय द्विवेदी,जो १९७८ से वकालत से जुड़े हैं । साहित्य, कानून, समाज, पठन,सामाजिक संगठन लेखन,साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियों में इनकी रूचि चरमोत्कर्ष पर रही है । ये जून -२००७ से हिंदी ब्लोगिंग में लगातार सक्रिय हैं और प्रत्येक वर्ष इनकी सक्रियता में इजाफा होता रहता है ।

अब एक ऐसे ब्लोगर की चर्चा , जिन्हें वरिष्ठ ब्लोगर श्री ज्ञान दत्त पाण्डेय ने भविष्य की सम्भावनाओं का ब्लॉगर कहा है ,श्री अनूप शुक्ल ने शानदार ब्लोगर कहा है वहीं श्री समीर लाल समीर ने उनके फैन होने की बात स्वीकार की है । रंजना (रंजू) भाटिया ने स्वीकार किया है कि उनका लिखा हमेशा ही प्रभावित करता है जबकि सरकारी नौकरी में रहते हुए भी अपनी संवेदना को बचाये रखना ....उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं डा अनुराग । नाम है सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी जिनके बारे में बहुचर्चित ब्लोगर डा अरविन्द मिश्र कहते हैं कि -"मैं सिद्धार्थ जी की लेखनी का कायल हूँ -ऐसा शब्द चित्र खींचते है सिद्धार्थ जी कि सारा दृश्य आखों के सामने साकार हो जाता है । उनमें सम्मोहित करने वाली शैली और संवेदनशीलता को सहज ही देखा, महसूस किया जा सकता है और एक प्रखर लेखनी की सम्भावनाशीलता के प्रति भी हम आश्वस्त होते है !" सत्यार्थ मित्र इनका प्रमुख ब्लॉग है । इन्होनें पूर्व की भाँती इस वर्ष भी महत्वपूर्ण पहल करते हुए महात्मा गांधी अंतरार्ष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के तत्वावधान में राष्ट्रीय ब्लोगर संगोष्ठी आयोजित की , जिसकी ब्लॉगजगत में काफी चर्चा हुई । इनकी मौन साधना के बारे में यही कहा जा सकता है कि इस वर्ष इनकी मौन साधना आगे-आगे चलती रही और सारे स्वर-व्यंजन के साथ समय पीछे-पीछे चलता रहा ।

खुशदीप सहगल हिंदी चिट्ठाकारी के वेहद उदीयमान,सक्रीय और इस वर्ष के सर्वाधिक चर्चित चिट्ठाकारों में से एक रहे हैं ! जिनके पोस्ट ने पाठकों को खूब आकर्षित किया और भाषा सम्मोहित करती रही लगातार ....जिनके कथ्य और शिल्प में गज़ब का तारतम्य रहा इस वर्ष ! विगत दिनों ब्लोगोत्सव-२०१० के दौरान उनका व्यंग्य "टेढा है पर मेरा है" और "किसी का सम्मान हो गया " प्रकाशित हुआ था जिसे आधार बनाते हुए उन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के चर्चित उदीयमान ब्लोगर का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया ।

बीते दिनों में बहुत कुछ गुजरा है, बहुत कुछ बदला है समय, समाज और हिंदी ब्लोगिंग में भी। हिंदी ब्लोगिंग इस बदलाव का साक्षी रहा है कदम-दर-कदम । लगातार अच्छे और कुशल ब्लोगरों के आगमन से यह हर पल केवल बदलाव का भागीदार ही नहीं रही है, अपितु बदलाव की अंगराई भी लेती रही है वक़्त-दर-वक़्त । सबसे सुखद बात तो यह है कि हिंदी ब्लोगिंग ने देवनागरी लिपि के माध्यम से हिंदी और उर्दू को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया है ।

कहा गया है कि अभिव्यक्ति की ताक़त असीम होती है और अर्थवान भी । वह संवाद कायम करती है , आपस में जोड़ती है , बिगड़ जाए तो दूरी पैदा करती है और खुश हो जाए तो भावनात्मक एकता का अद्भुत सेतु बना सकती है , वसुधैव कुटुंबकम की संकल्पना साकार कर सकती है । इसे साध लिया तो हर मंजिल आसान हो जाती है । आईये हिंदी ब्लोगिंग में सक्रिय कुछ ऐसे साधकों से आपको मिलवाते हैं जिन्होनें वर्ष-२०१० में अपनी सार्थक साहित्यिक-सांस्कृतिक और सकारात्मक गतिविधियों से हिंदी ब्लोगिंग को अभिसिंचित किया है ।
यदि वरिष्ठता क्रम को नज़रंदाज़ कर दिया जाए तो इस श्रेणी में पहला नाम आता है शैलेश भारतवासी का , जिनका प्रमुख ब्लॉग है हिंद युग्म । ये विगत पांच वर्षों से इंटरनेट पर यूनिकोड (हिंदी) के प्रयोग के प्रचार -प्रसार का कार्य कर रहे हैं । १६ अगस्त १९८२ को सोनभद्र (उ0 प्र0 ) में जन्में शैलेश का ब्लॉग केवल ब्लॉग नहीं एक संस्था है जो हिंदी भाषा, साहित्य,कला, संगीत और इनके अंतर्संवंधों को अपने वैश्विक मंच हिंद-युग्म डोट कॉम के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं । दुनिया के सभी वेबसाइटो को ट्रैफिक के हिसाब से रैंक देने वाली वेबसाईट अलेक्सा के अनुसार इस ब्लॉग का रैंक एक लाख के आसपास है जो हिंदी भाषा के कला-साहित्य -संस्कृति-मनोरंजन वर्ग के वेबसाईट में सर्वाधिक है । दुनिया की सभी वेबसाइटो के ट्रैफिक पर नज़र रखने वाली वेबसाईट स्टेटब्रेनडोटकॉम के अनुसार हिंद युग्म को प्रतिदिन लगभग ११००० से ज्यादा हिट्स मिलते हैं । भारत का ऐसा कोई कोना नहीं है , जहां पर इसके प्रयासों के बारे में कुछ लोग ही सही, परिचित नहीं है । विश्व में हर जगह , जहां पर हिंदी भाषा भाषी रहते हैं वहां इस ब्लॉग की चर्चा अवश्य होती है ।

इस श्रेणी के अगले ब्लोगर हैं देश के प्रख्यात व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय , जिनका ब्लॉग है प्रेम जनमेजय ।ये व्यंग्य को एक गंभीर कर्म तथा सुशिक्षित मस्तिष्क के प्रयोजन की विधा मानने वाले आधुनिक हिंदी व्यंग्य की तीसरी पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर हैंऔर ‘व्यंग्य यात्रा’ के संपादक भी । ये नुक्कड़ से भी जुड़े हैं । इनकी उपस्थिति मात्र से समृद्धि की नयी परिभाषा गढ़ने की ओर अग्रसर है हिंदी ब्लोगिंग । इस वर्ष ब्लोगोत्सव-२०१० पर प्रकाशित हिंदी ब्लोगिंग के विभिन्न पहलूओं पर उनके साक्षात्कार काफी चर्चा में रहे ।

इस श्रेणी के अगले ब्लोगर हैं डा दिविक रमेश , हिंदी चिट्ठाजगत में सक्रीय एक ऐसा कवि जो २० वीं शताब्दी के आठवें दशक में अपने पहले ही कविता संग्रह 'रास्ते के बीच' से चर्चित हुए ! जो ३८ वर्ष की ही आयु में 'रास्ते के बीच' और 'खुली आँखों में आकाश' जैसी अपनी मौलिक कृतियों पर 'सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड' जैसा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले पहले कवि बने । जिनका जीवन निरंतर संघर्षमय रहा है। जो ११ वीं कक्षा के बाद से ही आजीविका के लिए काम करते हुए शिक्षा पूरी की। जो १७ -१८ वर्षों तक दूरदर्शन के विविध कार्यक्रमों का संचालन किया और १९९४ से १९९७ में भारत की ओर से दक्षिण कोरिया में अतिथि आचार्य के रूप में भेजे गए, जहाँ साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उन्होंने कीर्तिमान स्थापित किए।ब्लोगोत्सव-२०१० में उन्हें वर्ष के श्रेष्ठ कवि का अलंकरण प्रदान किया गया ।

इस श्रेणी के अगले ब्लोगर हैं -रवीश कुमार, जिनका प्रमुख ब्लॉग है कस्बा qasba । ये एऩडीटीवी में कार्यरत हैं । ये अपने ब्लॉग पर अपनी ज़िन्दगी के वाकयों, सामयिक विषयों व साहित्य पर खुलकर चर्चा करते हैं, वहीं दैनिक हिन्दुस्तान में प्रत्येक बुद्धवार को ब्लॉग वार्ता के अंतर्गत प्रमुख उपयोगी और सार्थक ब्लॉग को प्रमोट करते है । इनके विषय में बरिष्ठ ब्लोगर रवि रतालामी का कहना है कि “चिट्ठाकारी ने लेखकों को जन्म दिया है तो विषयों को भी। आप अपने फ्रिज पर भी लिख सकते हैं और दिल्ली के सड़कों के जाम पर भी। नई सड़क पर रवीश ने बहुत से नए विषयों पर नए अंदाज में लिखा है और ऐसा लिखा है कि प्रिंट मीडिया के अच्छे से अच्छे लेख सामने टिक ही नहीं पाएँ। हिन्दी चिट्ठाकारी को नई दिशा की और मोड़ने का काम नई सड़क के जिम्मे भले ही न हो, मगर उसने नई दिशा की ओर इंगित तो किया ही है।”

इस श्रेणी के अगले ब्लोगर है गिरीश मुकुल , जिनके दो मुख्य ब्लॉग है गिरेश बिल्लोरे का ब्लॉग और मिसफिट सीधी बात जिसकी चर्चा इसबार खूब हुई । २९ नवंबर १९६३ को जन्में गिरीश मुकुल एम कोम, एल एल बी की शिक्षा प्राप्त करने के बाद बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं । आकाशवाणी जबलपुर से नियमित प्रसारण,पोलियो ग्रस्त बचों की मदद के लिए "बावरे-फकीरा" भक्ति एलबम,स्वर आभास जोशी,तथा नर्मदा अमृतवाणी गायक स्वर रविन्द्र शर्मा इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है । इनका मानना है कि हमेशा धोखा मिलने पर भी मामद माँगने वालों से कोई दुराग्रह नहीं होता। मदद मेरा फ़र्ज़ है ...!!

इस श्रेणी के अगले ब्लोगर हैं डा० टी० एस० दाराल :मेडिकल डॉक्टर, न्युक्लीअर मेडीसिन फिजिसियन-- ओ आर एस पर शोध में गोल्ड मैडल-- एपीडेमिक ड्रोप्सी पर डायग्नोस्टिक क्राइटेरिया -- सरकार से स्टेट अवार्ड प्राप्त-- दिल्ली आज तक पर --दिल्ली हंसोड़ दंगल चैम्पियन -- नव कवियों की कुश्ती में प्रथम पुरूस्कार --- अब ब्लॉग के जरिये जन चेतना जाग्रत करने की चेष्टा -- इनका यह उसूल है, हंसते रहो, हंसाते रहो. --- जो लोग हंसते हैं, वो अपना तनाव हटाते हैं. --- जो लोग हंसाते हैं, वो दूसरों के तनाव भगाते हैं. बस इन्हीं पवित्र सोच के साथ इन्होनें पूरे वर्ष भर अपनी सक्रियता से पाठकों को आकर्षित किया । इनका प्रमुख ब्लॉग है - अंतर्मंथन और चित्रकथा

इस श्रेणी के अगले, किन्तु महत्वपूर्ण ब्लोगर हैं ललित शर्मा : ललित शर्मा एक ऐसे सृजनकर्मी हैं जिनकी सृजनशीलता को किसी पैमाने में नहीं बांधा जा सकता ....हम सभी इन्हें गीतकार, शिल्पकार, कवि, रचनाकार आदि के रूप में जानते थे, किन्तु इस वर्ष हम उनके एक अलग रूप से मुखातिव हुए । जी हाँ चित्रकार और पेंटर बाबू के रूप में जब मैंने उनकी पेंटिंग की एक गैलरी लगाई ब्लोगोत्सव-२०१० में , इसमें से कुछ छायाचित्र सेविंग ब्लेड से बनाई गयी थी और कुछ एक्रेलिक कलर से । इनके निर्माण में ब्रुश की जगह सेविंग ब्लेड का प्रयोग किया था तथा उससे ही कलर के स्ट्रोक दिये गए थे । इन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० में वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (आंचलिक ) का अलंकरण प्रदान किया गया । इनके प्रमुख ब्लॉग है - ललित वाणी, अड़हा के गोठ, ललित डोट कोम ,ब्लोग४ वार्ता , शिल्पकार के मुख से आदि है ।

हमारे देश में इस वक्त दो अति-महत्वपूर्ण किंतु ज्वलंत मुद्दे हैं - पहला नक्सलवाद का विकृत चेहरा और दूसरा मंहगाई का खुला तांडव । अगली चर्चा की शुरुआत हम नक्सलवाद और मंहगाई से ही करेंगे ।फ़िर हम बात करेंगे मजदूरों के हक के लिए कलम उठाने वाले ब्लॉग , प्राचीन सभ्यताओं के बहाने कई प्रकार के विमर्श को जन्म देने वाले ब्लॉग और देश के अन्य ज्वलंत मुद्दे जैसे अयोध्या मुद्दा, भ्रष्टाचार आदि ....!

.......जारी है विश्लेषण मिलते है एक विराम के बाद...../

रवीन्द्र प्रभात

परिकल्पना ब्लॉग से साभार

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