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आखरी पन्नें -16 (दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')

25.1.110 पाठकों के सुझाव और विचार


आखरी पन्नें -16 (दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')
गतांक -15 से आगे
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शेख फरीदा मेरे दिल विच आ जा तू
बुझे होए 'दीपक'आ के जला जा तू
इश्क हक़ीकी की ए इश्क म्ज़ाजी की-ए
अस्सी जेहड़ा कित्ता ओहदा नाँ समझा जा तू
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(मुक्क चल्ली जिंद)
मुक्क चल्ली जिंद मुक्की यादां नाँ तेरियां
समझ न पाए सजणा अखां काहनू फेरियां
मुक्क चल्ली जिंद मुक्की या-------------
(1 )दिल दे खजानें विच दर्द भी तेरा-ए
अक्खां विच टुट्टे होए सुपणे दा डेरा-ए
झेल न पाया दिल गमां दी हनेरियाँ
मुक्क चल्ली जिंद मुक्की या-----
(2 )तेरा बिछोड़ा सजणा सैह नहीं सकदे
प्यार किन्नां कित्ता तैनूं कह नहीं सकदे
तैनूँ न आयी सजणा यादां कदे मेरियाँ
मुक्क चल्ली जिंद मुक्की या-------
(3)'दीपक कुल्लुवी'दा प्यार अनोखा-ए
धोखा खाया पर धोखा न दित्ता-ए
मिल न पाए सजणा हो गईयां देरियां
मुक्क चल्ली जिंद मुक्की या-----

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
09136211486
25 -01 -2011

HARMONIUM COMPOSITION

565F567JX2765X4(1ST.LINE OF MUKHRA&3RD,4TH.LINE OF ANTRA)
KX476X37JX2765(2ND LINE OF MUKHRA
KX576X27JX276(1ST&2ND.LINE OF ANTRA)
शेष अगले अंक 17 में
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