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दीपक शर्मा 'कुल्लुवी' आखरी पन्नें -14

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आखरी पन्नें -14

गतांक -13 से आगे

आज मेरे पिता श्री जयदेव विद्रोही जी का आज चंडीगढ़ में ऑपरेशन था लेकिन उन्होंने हमें बतलाया ही नहीं और कुल्लू से मेरी माँ के साथ अकेले ही चले आए और ' फोर्टीज 'हॉस्पिटल में भर्ती हो कर ऑपरेशन करवा लिया I इतना होंसला आज भी उनमें है और मेरी मजबूरी की चाहकर भी उनके पास नहीं पहुँच सकता था क्योंकि में दिल्ली में था और जब मुझे पता चला तो उस समय उन्हें ऑपरेशन थियेटर में ले जाया जा चुका था I मुझे उनसे बहुत प्यार है I हमें भी उन्हें बहत प्यार करते हैं I खैर खुदा की कृपा से ऑपरेशन सफल हुआ उनमें खुद्दारी इतनीं है की बह किसी को तंग नहीं करना चाहते थे दुनियाँ जहाँ के रंज-ओ-ग़म अकेले ही सहते रहते हैं I
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यह मैं जानता हूँ या मेरा खुदा
मुहब्बत की कितनीं पायी सजा
जलते रहे फिर भी हंसते रहे
ऐसी अनोखी थी अपनीं अदाI

भजन-ए-ग़ज़ल
मजबूर

दाता तेरे संसार में बंदा बड़ा मजबूर है
अपनों के होते हुए अपनों से कितना दूर है
---दाता तेरे संसार में बंदा ब-----
1 दिखाएँ किसको दिल के छाले
इल्तिजा किससे करें
तेरी महिमा तू ही जानें
क्या तुझे मंज़ूर है
दाता तेरे संसार में बंदा ब------
2 तुझसे भी शिकवा है दाता
मुआफ हमको न किया
तन्हा ही हमको कर दिया
यह गिला तुझसे ज़रूर है
दाता तेरे संसार में बंदा ब----
3 नाम 'दीपक'था मेरा
जला भी 'दीपक' की तरह
सारी दुनियां हंसती रही मुझपर
अपनें नाम का बड़ा गरूर था
दाता तेरे संसार में बंदा ब----

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
09136211486
१९-०१-२०११

श्याम भजन
अगर
मेरी भक्ति अगर श्यामा तुम्हें मंज़ूर हो जाए
तेरे दर पे कन्नैया हम भी आखिर मशहूर हो जाएँ -2
मेरी भक्ति अगर श्यामा तुम्हें------
(१) हमें दिल में जगह देना
भटक जाएँ कहीं न हम -२
भुलाना न हमें श्यामा
के तुझसे दूर हो जाएँ
मेरी भक्ति अगर श्यामा तुम्हें-----
(२) मुहब्बत तुझसे ऐसी है
न जीते हैं न मरते हैं-2
तेरी भक्ति में बंधने को
ही सारे मज़बूर हो जाए
मेरी भक्ति अगर श्यामा तुम्हें-----
(३) नशा तेरी इबादत का
न उतरे उम्र भर श्यामा-2
चढ़े इतना की दुनियां को
भी इसका सरूर हो जाए
मेरी भक्ति अगर श्यामा तुम्हें----
(४) यह 'दीपक' तेरा अपना है
तुझे पाने का सपना है-२
तू आ जा संवारे के खुद पे
मुझको गरूर हो जाए
मेरी भक्ति अगर श्यामा तुम्हें--

'दीपक शर्मा कुल्लुवी'
०९१३६२११४८६
१८-०१-११

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