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आखरी पन्नें -12

11.1.110 पाठकों के सुझाव और विचार


आखरी पन्नें -12

गतांक -11 से आगे

बचपन बहुत ही प्यारा होता है बचपन की यादें कभी नहीं भूलती हमेशा याद आती हैं स्कूल कालेज की यादें इंसान को हरदम तर-ओ-ताज़ा रखती हैं ,जवान बने रखती है चाहे वोह कितना भी बूढ़ा क्यों न हो जाए यह सुहानी यादें एक अंदरूनी शक्ति देती हैं

कहाँ भूलते हैं
हमनें संभाले वोह ख़त ज़िन्दगी भर
जो हमको मिले थे जब था अपना बचपन
वोह धुंधली सी यादें वोह धुंधले से चेहरे
कहाँ भूलते वो जो लगते थे हमदम
हमनें संभाले वोह ख़त ज़िन्दगी भर
जो हमको मिले थे जब था अ------
जवानी बुढ़ापे से बेहतर थे वोह पल
थे कितनें सपनें था पाक़ दामन
बूढ़ी आँखें ढूँढती हैं वही गुज़रे लम्हें
वोह स्कूल वो दरिया वोह खिड़की वोह संगम
हमनें संभाले वोह ख़त ज़िन्दगी भर
जो हमको मिले थे जब था अ------
वोह मिलजुल कर खाना कभी गुनगुनाना
कभी छेड़खानी कभी हँसना हँसाना
वोह फूल वोह लाकेट वोह अंगूठी , कलम
दफ़न है मेरे दिल में साथ रहते हैं हरदम
हमनें संभाले वोह ख़त ज़िन्दगी भर
जो हमको मिले थे जब था अ-----
अपना ही नहीं हाल उनका भी यही है
वोह हैं कहीं उनके सपनें कहीं हैं
दर्द-ओ-ग़म के हैं मंज़र जहन में कई
मीठी मीठी हैं यादें मीठे मीठे हैं ग़म
हमनें संभाले वोह ख़त ज़िन्दगी भर
जो हमको मिले थे जब था अ-----

दीपक शर्मा "कुल्लुवी"
09136211486
११-०१-११

PHOTO GOVT COLLEGE KULLU (HIMACHAL) OUR DRAMA TEAM
शेष अगले 13 अंक में


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