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आखरी पन्नें -(3 ) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'



बिग बॉस
वाह रे बिग बॉस
उड़ा दिए सबके होश
कलर टी वी पे यह क्या परोसा
भोली जनता से कर रहे धोखा
'अस्मित','बीना' की चिपका चिपकी
बेशर्मी की हद ही कर दी
'डौली विन्द्रा' के देख तमाशे
देख के अखियाँ भी झुक जावे
'पामिला' के लटके झटके
बूढी घोड़ी पर करोड़ों बरसे
ढाई करोड़ ले के हो गई फुर्र
न कोई ताल न कोई सुर
सबकी ही छवि धूमिल सी हो गई
'श्वेता' हो या 'मनोज तिवारी'
अंग्रेजी माहोल में फंस गई
दस्यु सुंदरी 'सीमा' बेचारी
सीधा सादा 'खली' बेचारा
भटके यहाँ पर मारा मारा
राशनिंग के चक्कर में
कैसे करता होगा गुज़ारा
,डौली विन्द्रा, के ड्रमों नें
'राखी' को दिया पछाड़
दोगलापन साफ़ झलकता
लोमड़ी सी है दहाड़
मेरी नज़र में बिग बॉस सीरियल
सारी दुनियां को यही सिखाता
लड़ाई झगडा चुगली ड्रामा
चूमा चाटी,अश्लील तमाशा
इससे ज्यादा कुछ नहीं इसमें
मेरा फ़र्ज़ था आपको समझाना
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मेरी नज़र में इंसान को अपना कीमती समय एसे घटिया से सीरियलों पर बर्वाद नहीं करना चाहिए कुछ न कुछ अच्छा करते रहना चाहिए आजकल लोग हर समय टी वी से चिपके रहते हैं कुछ प्रोग्राम तो फिर भी ठीक होते हैं अधिकतर समय बर्वाद करनें वाले ही होते हैं परिवार के साथ बैठकर देखने वाले भी नहीं होते खुद शर्मसार होना पड़ता है अच्छे की जगह बुरी चीज़ें ही सिखाने को मिलती हैं अश्लीलता की बाढ़ आ चुकी है अब हमें यह खुद फैसला करना है की बच्चों को बर्वाद होने से कैसे बचाया जाए
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कुछ तो तेरी याद को हमनें भुला दिया
और कुछ को मय के प्यालों में मिला दिया
अब जो साथ है,याद नहीं, कुछ और ही है
दिल के तयखानें से तेरा नाम ही मिटा दिया
दीपक शर्मा कुल्लुवी
०९१३६२११४८६
०९-१२-२०१०





2 comments:

  1. ताक-झांक के शौकीन बिना किसी कुंठा और अपराध-बोध के ऐसा करते रह सकें, इसीलिए ऐसे कार्यक्रम बनते हैं शायद.

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