'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

Bye, Bye, World

28.11.100 पाठकों के सुझाव और विचार

Slip I want away into slumber sweet and deep,
With the wings of goddess of sleep
Never to return but ever to fly.

From horizon to horizon will I flaot like a boat,
And swim like a bird in the world infinite,
And unknown to me yet mostly my own.

Soothed will I be from the hurries and worries,
And fret and fury of mundane,
With no askings, no ifs and buts of officialdom.

Yes, there, there, there far away into eternity,
Aching I am to pluck and scud away.
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