'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

संजोया सपना

28.11.105पाठकों के सुझाव और विचार

अकसर ऐसा होता है कि सपने टूट जाया करते हैं पर इंसान जज़्बाती है ना.............. फिर से नई आस के साथ सपने बुनने लगता है टूटता है, बिखरता है पर सपने संजोना बन्द नहीं करता.............बस सपनों को हकीकत में बदलते देखना चाहता है.........




संजोया सपना




संजोया हर सपना
                   पूरा कहां होता है ;


फिर भी हर इंसान
                  इनमें खोया रहता है ;


अकसर जब नींद में
                  सपनों का डेरा होता है ;


सच होने की आस लिए
                  नया सवेरा होता है ;


हर पल जब दिन का
                  रूख बदलता जाता है ;


सपनों के जहाँ में
                  हकीकत का दौर आता है ;


हर शाम गमगीन
                  रात अश्कों को पहरा होता है ;


बहता जाता है हर सपना
                 जो दिल ने संजोया होता है !!






                                                                                     सुमन ‘मीत’


Share this article :

+ पाठकों के सुझाव और विचार + 5 पाठकों के सुझाव और विचार

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.