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ऐसा हो नहीं सकता

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मेरी राख़ को दुनियां वालो
गंगा में ना बहाना

प्रदूषित हो चुकी बहुत
और उसे ना बढ़ाना
करम अगर होंगे अच्छे
तो मिल जाएगी मुक्ति
गंगा जी में बहाने से ही
मुक्ति नहीं मिल सकती
यह है सब बेकार की बातें
ऐसा हो नहीं सकता
किसी के कुकर्मों का अंत
इतना सुखद नहीं हो सकता
गर ऐसा हो जाता
तो हार कोई पापी तर जाता
पाप करने से यहाँ
कोई ना घबराता
कोई ना घबरा----

दीपक शर्मा कुल्लुवी
०९१३६२११४८६
२८-१०-२०१०
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