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आगमन

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कभी कहीं



                साँझ सवेरे


जब आती हो तुम


                तसव्वुर में मेरे ;


सहेज कर रख लेती हूँ


                दामन में अपने


ज्यूं आँखों में


               समेट लेते हैं सपने ;


न होती आने की


               किसी को भी आहट


सिर्फ खाली पन्नों पर


              होती है कुछ लिखावट !!

                                                                                सुमन 'मीत'


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