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..बहां है तम्बाकू पर पाबंदी

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न अदालत का आदेश न सरकार का फरमान फिर भी बरिजत है बहां धूम्रपान

आज देश में धूम्रपान पर सरकार नें पाबन्दी लगाई है. सार्बजनिक
स्थानों पर तम्बाकू का सेवन करने तथा बेचने की मनाही है. ऐसा माना जाता है की दुनिया में पहली बार केरल की एक अदालत ने रोक लगाई थी. देश में भले ही अब सर्कार ने तम्बाकू के उपयोग को रोकने के लिए फरमान जारी किया हो लेकिन पाचिमी हिमालय के हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला मुख्यालय के साथ सटी लग्ग घाटी के दर्ज़नों गाँव में देव परम्परानुसार सदियों से ही तम्बाकू के सेवन तथा अपने घरों के भीतर तक ले जाने की पाबन्दी है.इस घाटी में लगभग तीन दर्ज़न गाँव ऐसे है जहां देवी देवताओं के सम्मान में तम्बाकू के सेवन पर पाबन्दी है.सरकार के आदेश भले ही कागज़ी हों लेकिन कुल्लू की लग घाटी में आज भी इस परमपरा का निर्वहन किया जा रहा है .

  प्रकृति की गोद में भू भू जोत के आँचल में बस्सी खूबसूरत लग घाटी को अपनी अलग ही परम्पराओं के लिए जानी जाने बाली इस घाटी के   के मर्घन, बराग्रान , शिल्हाग्रान, दीफलां,लियानी , खारका, थाच,जान्गा, जिन्दी, तेलंग, चलाह,आदि गाँव में ढूमर्पान तो दूर की बात लेकिन घर के भीतर ले जाना भी किसी अपराध से कम नहीं है. घाटी के लोग बताते हैं की देव परम्परा से ही यह सब संभव हो पाया है और इसका सबसे बड़ा लाभ है की घाटी की हर पीढ़ी इस बुराई से बच पायी है.लोकास्था के अनुसार सिगरेट , बीरी आदि जेब में घर के भीतर ले जाना भी अपराध है और पकडे जाने पर देव परमपरानुसार दंड का प्राबधान भी है.जनश्रुति के अनुसार एक बार घाटी में असुर देवी फुंगनी की जान के दुश्मन बन गए थे. उसने असुरो से बचने का परयास किया. कहते हैं की देवी नें इन असुरो से बचने के लिए मधुमाखी का रूप धर लिया था और तम्बाकू के एक पौधे में खिले फूल में छिप गई. कहाबत है कि देवी नें तम्बाकू के पेड़  से आग्रह किया था की बह उसके फूल में छिपे होने की बात असुरो से न कहे. कहते हैं  की तभी तेज हबाएं चली . फूल डोलने लगे और मधमखी रूप में देवी फूल से बाहर छिटक गयी. कहा जाता  है कि देवी ने यह समझ लिया था कि तम्बाकू नें  ऐसा जानबूझ कर किया . घाटी के लोगों को आस्था है कि तब देवी नें तम्बाकू कि बंश बेल घाटी में  न फैलने  का शाप दिया था और बाद में यह घाटी कि परम्परा का हिस्सा ban गयी.घाटी के देवता  फलानी  नारायण, कृषण,सहित देवी देवताओं के अनुयायी आज भी देवाग्या का पालन कर रहे हैं . घाटी में प्रचलित देव परम्परा के अनुसार यदि इस कायदे को देवता के पदाधिकारी तोड़ते हैं तो उन्हें पदच्युत करने तक का प्राबधान है .अभी तक घाटी में न तो किसी सरकार का आदेश है और न ही अदालत का फरमान है लेकिन कुल्लू कि लग घाटी में आज भी एक परम्परा जिंदा है बैग भी इसी जिसे अब सरकार भी लागू करने के pryas में है . जिस घाटी में अभी तक dhoomarpan करने बाला अपराधी मन जाता है उस घाटी के लोगों को भी अब भय सताने लगा है ही कहीं आधुनिकता के दौर में खोती  जा रहीं संस्कृति के साथ साथ यह समृद्ध एवं अनूठी परम्परा भी बिलुप्त न हो जाये . लेकिन सूदूर पहाड़ों के आँचल में बसे इन् गाँव को तम्बाकू निषेध करने के लिए पहल करने का श्रेय तो जाता ही है

 
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