'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

चीनी लघु कथा- परस्पर सहयोग

11.6.102पाठकों के सुझाव और विचार

श्रीमान ई पिछले कई वर्षों से साहित्य की दुनिया में संघर्षशील थे, पर आज तक उन्हें कोई प्रसिद्धि  नहीं मिल पाई । उन्होंने अपने सारे सम्पर्कों का लाभ उठाया, फ़िर भी शोहरत नहीं मिली । एक दिन उनकी मुलाकात प्रसिद्ध  आलोचक च्यांग से हुई। उन्होंने च्यांग महोदय को अपने घर भोजन पर आमंत्रित किया। श्रीमान ई की मेहमानवाजी से प्रसन्न होकर च्यांग ने कहा, ‘आपकी बेकद्री अच्छी बात नहीं है। मैं आपके बारे में एक प्रशंसात्मक लेख लिखूंगा और उसे किसी प्रसिद्द समाचार- पत्र या पत्रिका में प्रकाशित करवाऊँगा । आपकी रचनाओं की तुलना...।’
आलोचक च्यांग की बात पूरी होने के पूर्व ही श्रीमान ई बोल उठे, ‘कृपया आप मेरी रचनाओं की प्रशंसा न करें। मैं विनती करता हूं कि आप मेरी रचनाओं की आलोचना करें। अपने पिछले दस वर्षों की जानकारी के आधार पर मैं कह सकता हूं कि आपने जिन कृतियों की आलोचना की है, वे देश-विदेश में प्रसिद्ध  हुई हैं। इससे आपका मान भी बढ़ेगा और पैसे भी मिलेंगे। इसे ही परस्पर सहयोग कहते हैं।


गिरिराज  ९-१५ जून २०१० में प्रकाशित
Share this article :

+ पाठकों के सुझाव और विचार + 2 पाठकों के सुझाव और विचार

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.