sponsor

sponsor

Slider

समाचार

साहित्‍य

धर्म और संस्‍कृति

स्‍वास्‍थ्‍य

इतिहास

खेल

विडियो

» » » लघुकथा - बेबसी


अंतत: दोनों भाइयों ने बस में पांच सीटें  बुक कराई! सबसे पीछे की । दो अपने लिए और तीन मां ·के लिए। मां बहुत बीमार थी। वह लेट कर ही वापस गांव  जा सकती थी। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था और साथ ही यह भी कहा कि  घर पर ही जितनी सेवा हो सकती है, करो।

बड़ा भाई दिल्ली में ही काम करता था। उसके पास जो कुछ जमा-पूंजी थी, मां के इलाज में खप गई। पैसे होते, तो वह मां को किसी टेक्सी में ले जाता।

दोनों बेटों के बीच मां आंखे मूंदे सो रही थी। बस ने आधे से अधिक फासला तय कर लिया था। तीन सीटों की  टिकट लेने के कारण खड़े रहने को  विवश किसी यात्री से तकरार भी नहीं हुई। कंडक्टर भी उनके  ही इलाके का था। उसी ने सलाह दी थी कि इसी तरह बीमार मां गांव पहुंच सकती है, वरना रास्ते में सवारियां हील-हुज्जत करेगी।

अचानक मां की  देह में  जुंबिश हुई और उसके प्राण पखेरू उड़ गए। पिछली सीट पर बैठे दोनो भाइयों ने  एक दूसरे की ओर कातर निगाह से  देखा। बड़े भाई ने अपने होठों पर उंगली रखकर छोटे को  चुप रहने का इशारा किया। छोटे भाई की आंखों में  आंसू तैरने  लगे । उसका जी कर रहा था कि मां की मौत पर दहाड़ मार-मार कर रोए, पर परिस्थिति   को समझ कर  वह घुटा-घुटा आंसू बहाता रहा और थोड़ी देर में चुप हो गया।

«
Next
नई पोस्ट
»
Previous
पुरानी पोस्ट

6 पाठकों के सुझाव और विचार:

  1. बहुत मार्मिक.....वैसे ऐसा ही सच एक बार हो चुका है...उस माँ के साथ उसका इकलौता बेटा था...और बस में ही माँ के प्राण पखेरू उड़ गए थे...क्या बीती होगी उस पर?

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत मार्मिक. पढते पढते धुंधला सा दिखाई देने लगा.

    उत्तर देंहटाएं
  3. रत्नेश जी आपकी लघुकथा बहुत अच्छी लगी.. आजकल मैं भी इसी तरह की एक सीरीज चला रहा हूँ, निवेदन है कि मेरी लघुकथाओं को देख मार्गदर्शन करें..

    उत्तर देंहटाएं

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.