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                                एक  छात्र को कहते सुना :" यार अब तो मौज ही मौज है ! पढ़ो चाहे न पढ़ो पास तो हो जायेंगे ! सुना है CCE वाले सब को पास करने आ  गए हैं! दुसरे ने कहा  : " अरे अब तो गुरूजी को पास करना ही होगा! CCE  के साथ रिजल्ट आंकलन भी तो आ गया है ! सुना है   २५ % से कम वालों की पगार काट दी जाएगी ! अब तो हमारे हाथ में लड्डू ही लड्डू हैं!
                              उधर अध्यापक चाय की दूकान पर बैठे चुटकी ले रहे थे:" अब तो पढ़ने पढ़ाने का स्यापा भी जाता रहा ! किसे क्या ग्रेड देना है, ये  हमारी मर्जी  ! हम पढ़ाएं या न, हमारी मर्जी ! सरकार भी क्या गजब  का काम करती है ! " वाह, रिजल्ट मूल्याँकन निति भी ऐसे वक्त आई है, जब इम्प्लेमेन्ट होगी तब तक रिजल्ट ही नहीं रहेगा! स्कूल आओ,  हाजिरी लगाओ और चोखी पगार लो! अगर रिजल्ट का स्यापा रह  ही गया तो नक़ल देना न देना तो हमारे हाथ में है ! ड्यूटी भी हम देंगे और फ्लाईंग   ड्यूटी भी हमारे भाई ही करेंगे ! तो भैया ये तो हमरे हाथ में भी लड्डू ही लड्डू !        
                              एक अभिभावक के कान में ये बात गयी तो हँसते हँसते रोने लगा : " अरे भाई कोई ये तो बताओ  मेरे हाथ में क्या आया  ! परियोजना  अधिकारी भी खीज कर बोले :" सच पूछो तो  हम भी नहीं कह सकते  आपके हाथ में क्या होगा ! पर हम फिर भी कहेंगे की शिक्षा का स्तर बढ़ेगा ! सरकार ऐसा कहती है ! 
                            मंत्री जी बोले:"  शिक्षा का स्तर जरूर बढ़ेगा क्योंकि हम मैं न कोई अध्यापक है न ही कोई छात्र और पप्पू का पापा चाहता है पप्पू पास होना चाहिए !पप्पु भी खुश और पप्पु का पापा भी खुश !  तो भाई जब सब के हाथ में लड्डू हैं तो शिक्षा का स्तर घटे या बढ़े क्या फर्कै ? पर हाँ इतना खर्च हो रहा है तो जरूर स्तर बढ़ेगा !
                शिक्षा मैं सोचे समझे प्रयोग हमें अनिश्चत परिणामों की ओर ले जा रहे हैं ! परिणाम कितने भयन्कर होंगे, एक शिक्षक होने के नाते में भलिभांति अनुमान लगा सकता हूं !   लोकतंत्र के मक्कड़्जाल में यहाँ कौन से तंत्र का मन्त्र चल रहा है मैं  यह सोचते सोचते खामोश हो जाता हूं, !पर  बहुत खतरनाक होता है बेजान ख़ामोशी से भर जाना ---------------!

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1 पाठकों के सुझाव और विचार:

  1. यह हमारा दुZभाग्य था कि हमें इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली से गुजरना पडा जिसमे सिफZ रटंत शिक्षा का बोलबाला था। जिस कारण आज भी हम सिफZ Well Trained है Well Educated नही। वास्तविक्ता यह है कि अधिकांश आज का कला स्तातक एक अनपढ से कम नही जिसे शिक्षा के समय अपने फामZ तक भरने नही आते व शिक्षा के पश्चात किसी भी विष्य में निपुण्ता न होने के कारण स्वंम को ही किसी कायZ के योग्य नही समक्षतेे। इसलिए माननीय बाली जी हमें शायद इस नइZ शिक्षा प्रणाली का स्वागत करना चाहिए शायद रटंत शिक्षा से निजात पाकर हमारे नवयुवक जब अपनी Creativity के साथ शिक्षा गzहण करेगे तो शायद Intelligence and Knowledge without Morality and Modesty की प्रणाली खत्म होकर एक सुशिक्षति समाज के निमाZण हो सके व Lord Me-kale की बाबू बनाने बाली रटंत शिक्षा प्रणाली से निजात पाने का पहला कदम शायद यही से शुरु हो

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