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याद आता है.......



याद आता है
वो माँ का लोरी सुनाना
कल्पना के घोड़े पर
परियों के लोक ले जाना
चुपके से दबे पांव
नींद का आ जाना
सपनों की दुनियाँ में
बस खो जाना ...खो जाना...खो जाना..................


याद आता है
वो दोस्तों संग खेलना
झूले पर बैठ कर
हवा से बातें करना
कोमल उन्मुक्त मन में
इच्छाओं की उड़ान भरना
बस उड़ते जाना...उड़ते जाना...उड़ते जाना.............


याद आता है
वो यौवन का अल्हड़पन
सावन की फुहारें
वो महका बसंत
समेट लेना आँचल में
कई रुमानी ख़ाब
झूमना फिज़ाओं संग
बस झूमते जाना...झूमते जाना...झूमते जाना............


याद आता है
वो हर खुशनुमा पल
             बस याद आता है..............
                            याद आता है.............
                                         याद आता है................!!


                                                                                         सुमन 'मीत'

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3 पाठकों के सुझाव और विचार:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. DHANYAWAAD BLOG PAR ANE AUR AUR MERA HOSLA BADHANE KE LIYE
    UMEED HAI AGE BHI MERA HOSLA BADHAYEGE

    उत्तर देंहटाएं

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