'हिमधारा' हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स का मंच

लघुकथा- ठीक हैं हम

8.5.103पाठकों के सुझाव और विचार



‘‘ट्रिंग.... ट्रिंग’’
फोन की घंटी घनघनाई। मालती वर्मा ने कुर्सी से उठकर अपने घुटनों की मर्मांतक पीड़ा से उबरने का
प्रयास किया। फिर धीरेधीरे चलकर चोगे तक पहुँचीं।
दूसरे सिरे पर दूर शहर से उनकी हमउम्र शीला थी। दोनों अब पैंसठ की उम्र तक जा पहुँची हैं।
‘‘
और मालती, कैसी हो ?.. भाई साहब कैसे हैं ?’’
मालती वर्मा के होठों पर मुस्कुराहट तिर गई।
‘‘
ठीक हैं हम लोग। तू सुना बड़े दिनों के बाद याद किया।’’
‘‘
बस यों ही। सोचा, चलो हालचाल ही पूछ लूँ।’’
‘‘
तुमलोग कैसे हो ?’’
‘‘
प्रभुकृपा है। उसे ही याद करते हैं। अब उम्र ही ऐसी ठहरी।’’ शीला की हँसी सुनाई देती है।
मालती ने आगे पूछा, ‘‘दोनों बेटेबहुएं, बच्चे कैसे हैं ?’’
‘‘
मजे में हैं। हम दोनों का बहुत खयाल रखते हैं।’’ शीला झूठ बोल गई। दोनों बेटे तो कब से उनसे अलग होकर रहने लगे हैं।
अब कहने की बारी उस ओर से थी।
‘‘
तुम्हारा रोहित तो अकेला ही लाखों में एक है। तुम दोनों की खूब सेवा करता होगा ?’’
‘‘
हाँ’’, कहते हुए मालती वर्मा हँस पड़ीं, एक नकली हँसी जो चेहरे पर साफ झलक रही थी, पर इस समय उसका चेहरा देखने वाला वहां कोई नहीं था। थीं तो सिर्फ़ सहलाती हुई आवाजें। अब मालती वर्मा अपनी सहेली को क्या बताए कि उनका श्रवण कुमार तो पिछले चार वर्षों से विदेश में है। 


Share this article :

+ पाठकों के सुझाव और विचार + 3 पाठकों के सुझाव और विचार

एक टिप्पणी भेजें

हिमधारा हिमाचल प्रदेश के शौकिया और अव्‍यवसायिक ब्‍लोगर्स की अभिव्‍याक्ति का मंच है।
हिमधारा के पाठक और टिप्पणीकार के रुप में आपका स्वागत है! आपके सुझावों से हमें प्रोत्साहन मिलता है कृपया ध्यान रखें: अपनी राय देते समय किसी प्रकार के अभद्र शब्द, भाषा का प्रयॊग न करें।
हिमधारा में प्रकाशित होने वाली खबरों से हिमधारा का सहमत होना अनिवार्य नहीं है, न ही किसी खबर की जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य हैं।

Materials posted in Himdhara are not moderated, HIMDHARA is not responsible for the views, opinions and content posted by the conrtibutors and readers.